एक बे-हासिल तलब बे-नाम इक मंज़िल बना

  - Khwaja Shauq
एकबे-हासिलतलबबे-नामइकमंज़िलबना
टूटनेकेबा'दहीदिलदर-हक़ीक़तदिलबना
मंज़िलेंहीक्यानयाहरजादा-ए-मंज़िलबना
लेकिनअपनेआपकोपहलेकिसीक़ाबिलबना
हमफ़रेब-ए-रंग-ओ-बूखाकरभीआगेबढ़गए
कम-निगाहोंकेलिएहरमरहलामुश्किलबना
किसक़दरअहद-आफ़रींआलमहैतेरीज़ातका
जोतेरीमहफ़िलमेंआयावोख़ुदइकमहफ़िलबना
ग़मसेना-मानूसरहनेतकथींसारीतल्ख़ियाँ
रफ़्तारफ़्ताग़महीअपनीउम्रकाहासिलबना
पीगएकितनेहीआँसूहमब-नाम-ए-ज़िंदगी
एकमुद्दतमेंकहींदिलदर्दकेक़ाबिलबना
जज़्बा-ए-मंज़िलसलामतरास्तोंकीक्याकमी
हमजिधरनिकलेनयाइकजादा-ए-मंज़िलबना
हरमक़ाम-ए-ज़िंदगीपरथामेराआलमजुदा
मैंकहींतूफ़ाँकहींकश्तीकहींसाहिलबना
तब्सिरेकरनेलगेहैंलोगहस्ब-ए-हौसला
'शौक़'आसानीसेमैंकुछऔरभीमुश्किलबना
  - Khwaja Shauq
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