zikr uskaa hi raha ishq ke afsaano men | ज़िक्र उसका ही रहा इश्क़ के अफ़्सानों में

  - Priya omar
ज़िक्रउसकाहीरहाइश्क़केअफ़्सानोंमें
नामआयाकभीपरमेरेउन्वानोंमें
थाबनायाबड़ीमेहनतसेजोघरवालिदने
आजशामिलहुआतक़सीमकेपैमानोंमें
जामसेकमनहींहैंआँखेंभीउनकीसाक़ी
कोईकमबख़्तहीआएतिरेमयख़ानोंमें
इसक़दरइश्क़हैमाँझीकोसमुंदरसेअब
वस्लकीचाहतेंखीचेंउसेतूफ़ानोंमें
अबकिसीबातकाशिकवाशिकायतहैप्रिया
अश्क़सबज़ब्तहुएआँखोंकेज़िन्दानोंमें
  - Priya omar
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