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Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
mujhe tum yaad na aanaa kabhi bhi
mujhe tum yaad na aanaa kabhi bhi | मुझे तुम याद ना आना कभी भी
- Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
मुझे
तुम
याद
ना
आना
कभी
भी
मैं
तुमको
भूल
जाना
चाहता
हूँ
सताएं
हिज्र
की
रातें
तुम्हें
भी
मैं
इतना
याद
आना
चाहता
हूँ
- Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
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इस
से
पहले
कि
ज़मीं-ज़ाद
शरारत
कर
जाएँ
हम
सितारों
ने
ये
सोचा
है
कि
हिजरत
कर
जाएँ
दौलत-ए-ख़्वाब
हमारे
जो
किसी
काम
न
आई
अब
किसी
को
नहीं
मिलने
की
वसिय्यत
कर
जाएँ
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Idris Babar
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हम
कहाँ
और
तुम
कहाँ
जानाँ
हैं
कई
हिज्र
दरमियाँ
जानाँ
Jaun Elia
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अमीर
इमाम
के
अश'आर
अपनी
पलकों
पर
तमाम
हिज्र
के
मारे
उठाए
फिरते
हैं
Ameer Imam
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सुब्ह
तक
हिज्र
में
क्या
जानिए
क्या
होता
है
शाम
ही
से
मिरे
क़ाबू
में
नहीं
दिल
मेरा
Jigar Moradabadi
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मर्म
हँसने
का
समझ
पाए
ज़रा
हम
देर
से
वस्ल
जिसको
कह
रहे
थे
हिज्र
की
बुनियाद
थी
Atul K Rai
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'मुनीर'
अच्छा
नहीं
लगता
ये
तेरा
किसी
के
हिज्र
में
बीमार
होना
Muneer Niyazi
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तू
परिंदा
है
किसी
शाख़
को
घर
कर
लेगा
जो
तेरे
हिज्र
का
मारा
है
किधर
जाएगा
Shadab Javed
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बता
रहा
है
झटकना
तेरी
कलाई
का
ज़रा
भी
रंज
नहीं
है
तुझे
जुदाई
का
मैं
ज़िंदगी
को
खुले
दिल
से
खर्च
करता
था
हिसाब
देना
पड़ा
मुझको
पाई-पाई
का
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Azhar Faragh
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मिरी
ज़िंदगी
तो
गुज़री
तिरे
हिज्र
के
सहारे
मिरी
मौत
को
भी
प्यारे
कोई
चाहिए
बहाना
Jigar Moradabadi
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या'नी
कि
इश्क़
अपना
मुकम्मल
नहीं
हुआ
गर
मैं
तुम्हारे
हिज्र
में
पागल
नहीं
हुआ
वो
शख़्स
सालों
बाद
भी
कितना
हसीन
है
वो
रंग
कैनवस
पे
कभी
डल
नहीं
हुआ
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Kushal Dauneria
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पढ़ाई
में
नहीं
लगता
है
जानाँ
हमारा
दिल
तो
तुम
सेे
लग
चुका
है
Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
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जिसे
समझा
बहुत
अच्छा
वहीं
कितना
बुरा
निकला
मेरा
ही
यार
हाथों
में
लिए
कट्टा
छुरा
निकला
Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
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ज़ख़्म
जो
भी
थे
भर
चुके
हैं
अब
लोग
दिल
से
उतर
चुके
हैं
अब
Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
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बुरी
आदत
सुरा
पीना
जो
कहता
था
सदा
मुझ
सेे
उसी
के
पास
से
देखो
कि
कैसे
हैं
सुरा
निकला
Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
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समझकर
के
ख़ुदा
जिसको
बिठा
बैठे
थे
माथे
पर
वही
इंसान
सारे
भ्रम
मुझ
में
से
मिटा
निकला
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Kavi Bhimsen Singh Ujjwal
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