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Kashif Sayyed
usii ke naam se har kaam ka aaghaaz karta hooñ
usii ke naam se har kaam ka aaghaaz karta hooñ | उसी के नाम से हर काम का आग़ाज़ करता हूँ
- Kashif Sayyed
उसी
के
नाम
से
हर
काम
का
आग़ाज़
करता
हूँ
जबीं
है
ख़ाक
पर
सो
अर्श
तक
परवाज़
करता
हूँ
मेरे
दुश्मन
भी
मेरी
इस
अदा
पर
दाद
देते
हैं
मैं
इस
अंदाज़
से
उनको
नज़र
अंदाज़
करता
हूँ
मुझे
इक
राज़
से
पर्दा
उठाना
जब
भी
होता
है
किसी
को
राज़दारी
से
शरीक-ए-राज़
करता
हूँ
- Kashif Sayyed
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उम्र
भर
कौन
निभाता
है
त'अल्लुक़
इतना
ऐ
मेरी
जान
के
दुश्मन
तुझे
अल्लाह
रक्खे
Ahmad Faraz
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आप
बच्चों
का
दिल
नहीं
तोड़ें
भाई
ये
दुश्मनी
हमारी
है
Vishnu virat
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मुझ
से
नफ़रत
है
अगर
उस
को
तो
इज़हार
करे
कब
मैं
कहता
हूँ
मुझे
प्यार
ही
करता
जाए
Iftikhar Naseem
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इसलिए
लड़ता
है
मुझ
सेे
मेरा
दुश्मन
उसका
भी
मेरे
सिवा
कोई
नहीं
है
Aves Sayyad
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दुश्मनी
का
सफ़र
इक
क़दम
दो
क़दम
तुम
भी
थक
जाओगे
हम
भी
थक
जाएँगे
Bashir Badr
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दुश्मनी
लाख
सही
ख़त्म
न
कीजे
रिश्ता
दिल
मिले
या
न
मिले
हाथ
मिलाते
रहिए
Nida Fazli
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ये
सच
है
नफ़रतों
की
आग
ने
सब
कुछ
जला
डाला
मगर
उम्मीद
की
ठण्डी
हवाएँ
रोज़
आती
हैं
Munawwar Rana
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इज़हार-ए-इश्क़
उस
से
न
करना
था
'शेफ़्ता'
ये
क्या
किया
कि
दोस्त
को
दुश्मन
बना
दिया
Mustafa Khan Shefta
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कहाँ
की
दोस्ती
किन
दोस्तों
की
बात
करते
हो
मियाँ
दुश्मन
नहीं
मिलता
कोई
अब
तो
ठिकाने
का
Waseem Barelvi
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तेरे
वादे
से
प्यार
है
लेकिन
अपनी
उम्मीद
से
नफ़रत
है
पहली
ग़लती
तो
इश्क़
करना
थी
शा'इरी
दूसरी
हिमाक़त
है
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Mehshar Afridi
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इक
दूसरे
को
छोड़
के
जाने
की
बात
है
अपनी
नहीं
ये
सारे
ज़माने
की
बात
है
बस
यूँँ
समझ
लो
उन
सेे
मेरा
कद
बलंद
है
जिनके
लबों
पे
मुझको
गिराने
की
बात
है
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Kashif Sayyed
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मुसलसल
रो
रहा
हूँ
फिर
भी
क्यूँँ
रोने
से
डरता
हूँ
जिसे
पाया
नहीं
अब
तक
उसे
खोने
से
डरता
हूँ
सुनहरा
ख़्वाब
बनकर
इक
अज़ाब
आँखों
पे
उतरा
था
ज़माना
हो
गया
पर
आज
भी
सोने
से
डरता
हूँ
बहुत
ज़रख़ेज़
है
दिल
की
ज़मीं
मालूम
है
लेकिन
वफ़ा
के
बीज
इस
मिट्टी
में
फिर
बोने
से
डरता
हूँ
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Kashif Sayyed
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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बह
गई
याद
उसकी
पानी
में
अब
बचा
क्या
है
ज़िंदगानी
में
आप
ने
ग़ौर
से
पढ़ा
ही
नहीं
हम
भी
मौजूद
थे
कहानी
में
काश
तुम
सेे
मिलें
किसी
दिन
यूँँ
जैसे
मिलता
है
पानी
पानी
में
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Kashif Sayyed
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मुफ़लिसी
थी
और
हम
थे
घर
के
इकलौते
चराग़
वरना
ऐसी
रौशनी
करते
कि
दुनिया
देखती
Kashif Sayyed
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