ग़ुबार होने लगीं ज़िंदगी में सब चीज़ें

  - Kashif Husain Ghair
ग़ुबारहोनेलगींज़िंदगीमेंसबचीज़ें
येमेरावहमहैयावाक़'ईमेंसबचीज़ें
किसीभीचीज़सेइसमेंकमीनहींआती
इज़ाफ़ाकरतीहैंतेरीकमीमेंसबचीज़ें
येइंकिशाफ़हुआहैअँधेराबढ़नेसे
दिखाईदेतीनहींरौशनीमेंसबचीज़ें
निकलरहाथामैंघरसेतोकलनज़रआईं
ग़ुरूबहोतीहुईउसगलीमेंसबचीज़ें
यहीग़ियाबमेंमेरेकलामकरतीहैं
जोचुपहैंअबमेरीमौजूदगीमेंसबचीज़ें
वोवक़्तबीतचुकाअबअजीबलगतीहैं
पसंदआतीरहींजोख़ुशीमेंसबचीज़ें
मैंकिसतरहसेतुम्हारीसदापेरुकजाऊँ
किचलरहीहैंमेरीहमरहीमेंसबचीज़ें
मेरेबदलनेसेयेइंक़लाबआयाहै
बदलगईहैंघड़ीदोघड़ीमेंसबचीज़ें
मगरयेशहरहै'काशिफ़-हुसैन'दश्तनहीं
रवासहीमियाँदीवानगीमेंसबचीज़ें
  - Kashif Husain Ghair
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