titli kanwal gulaab ki rangat men pad gaye | तितली कंवल गुलाब की रंगत में पड़ गए

  - Kashif Adeeb Makanpuri
तितलीकंवलगुलाबकीरंगतमेंपड़गए
जबसेहुज़ूरआपकीसोहबतमेंपड़गए
तुमकोतोहोशियारसमझतेथेहममगर
तुमकोयेक्याहुआकिमोहब्बतमेंपड़गए
हमइस
लिएभीऔरतरक़्क़ीकरसके
भोलेसेचेहरेदेखेमुरव्वतमेंपड़गए
ख़ुदहमनेअपनासाथबहुतदूरतकदिया
आख़िरमेंहमभीअपनीज़ुरुरतमेंपड़गए
तुमनेज़रासीबातकोजबतूलकरदिया
जितनेभीअक़्लमन्दथेहैरतमेंपड़गए
जंगलमेंकोईआदमीआयाज़ुरूरहै
क्यूँँजानवरभीबुग़्ज़ोअदावतमेंपड़गए
उसदिनसेअपनेवारेन्यारेहीहोगए
जिसदिनसेतेरेकूचऐउल्फ़तमेंपड़गए
इज़हारेइश्क़जबसेकियाहैज़बानसे
काशिफ़अदीबतुमभीक़यामतमेंपड़गए
  - Kashif Adeeb Makanpuri
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