खुलचुकीहैआँखलेकिनमैंअभीसपनेमेंहूँ
पाँवसहरामेंहैंमैंअबभीतेरेकमरेमेंहूँ
फूलकहतेहैंकिवोकाँटोंमेंभीमहफ़ूज़हैं
औरइकतितलीहैजोकहतीहैमैंख़तरेमेंहूँ
हिज्रकामौसमनहींपरवस्लभीहासिलकहाँ
सामनेबैठाहैवोऔरमैंअभीख़दशेमेंहूँ
वक़्तबीताजारहाहैऔरमुसीबतसरपेहै
वोवहाँबेसुधपड़ाहैऔरमैंरस्तेमेंहूँ
इकसमुंदरकश्तियोंकोथामकरबैठारहा
मौजइककहतीरहीमैंवक़्तकेकहनेमेंहूँ
तुमसहरकबसेमुझेअपनासगाकहनेलगे
तुमतोकहतेथेकिमैंइकदूरकेरिश्तेमेंहूँ