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Karan Sahar
vasl kii baat hi nahin hoti
vasl kii baat hi nahin hoti | वस्ल की बात ही नहीं होती
- Karan Sahar
वस्ल
की
बात
ही
नहीं
होती
इस
तरह
आशिक़ी
नहीं
होती
आग
ख़ुद
को
लगाए
बैठा
हूँ
फिर
भी
क्यूँ
रौशनी
नहीं
होती
हिज्र
में
ही
तो
ये
सहूलत
है
वस्ल
में
शा'इरी
नहीं
होती
- Karan Sahar
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लगा
आग
पानी
को
दौड़े
है
तू
ये
गर्मी
तेरी
इस
शरारत
के
बाद
Meer Taqi Meer
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ख़ुदा
के
लिए
अब
न
उस
सेे
मिलो
तुम
तुम्हें
अब
हमारी
जलन
की
क़सम
है
Tanoj Dadhich
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ये
इश्क़
नहीं
आसाँ
इतना
ही
समझ
लीजे
इक
आग
का
दरिया
है
और
डूब
के
जाना
है
Jigar Moradabadi
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हो
न
हो
एक
ही
तस्वीर
के
दो
पहलू
हैं
रक़्स
करता
हुआ
तू
आग
में
जलता
हुआ
मैं
Shahid Zaki
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अपने
बदन
की
तुम
भी
हिफ़ाज़त
न
कर
सके
हम
ने
भी
ख़ूब
ग़ैर
के
चूल्हे
से
आग
ली
Harsh saxena
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वो
आग
बुझी
तो
हमें
मौसम
ने
झिंझोड़ा
वर्ना
यही
लगता
था
कि
सर्दी
नहीं
आई
Khurram Afaq
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आग
का
क्या
है
पल
दो
पल
में
लगती
है
बुझते
बुझते
एक
ज़माना
लगता
है
Kaif Bhopali
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ये
इश्क़
आग
है
और
वो
बदन
शरारा
है
ये
सर्द
बर्फ़
सा
लड़का
पिघलने
वाला
है
Shadab Asghar
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उनके
लहजे
में
आग
है
साहब
ये
तो
हम
हैं
जो
भीग
जाते
हैं
Atul K Rai
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पराई
आग
पे
रोटी
नहीं
बनाऊँगा
मैं
भीग
जाऊँगा
छतरी
नहीं
बनाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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दूर
सहरा
में
जा
के
सोऍंगे
नींद
को
आज़मा
के
सोऍंगे
ख़्वाब
बरसों
जगा
के
रखते
हैं
ख़वाब
से
बच
बचा
के
सोऍंगे
आदमी
वक़्त
पर
नहीं
उठता
हम
परिंदों
में
जा
के
सोऍंगे
तुम
चराग़ों
से
गुफ़्तगू
करना
हम
तो
चादर
चढ़ा
के
सोऍंगे
शोर
हो
भीड़
हो
कि
जंगल
हो
यार
हम
कुल
मिला
के
सोऍंगे
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Karan Sahar
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अपना
रोना
आप
न
रो
घर-घर
के
दालान
भिगो
वो
क्यूँ
मुड़
कर
देखेगा
उसके
दिल
में
कुछ
तो
हो
तन्हाई
का
एक
इलाज
ख़ुद
के
दो
हिस्से
कर
लो
हम
लोगों
के
नाम
नहीं
तुम
तो
अपने
नाम
लिखो
आठ
बजे
का
वा'दा
था
बजने
को
हैं
रात
के
दो
ओ
सहरा
के
दीवानों
डूब
के
दरिया
पार
करो
आज
तुम्हारी
शादी
है
आज
तो
उसका
नाम
न
लो
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Karan Sahar
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पहले
तो
इस
हिज्र
ने
जम
कर
बारिश
की
फिर
बारिश
में
मोर
नचाया
यादों
ने
Karan Sahar
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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तसव्वुर
ने
बनाया
एक
साया
फिर
असली
धूप
से
उसने
बचाया
तुझे
इक
ख़्वाब
की
मानिंद
समझा
तुझे
दिन
भर
जिया
शब
भर
सजाया
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Karan Sahar
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