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Karal 'Maahi'
Laa mutmain hai wo jise dil khol kar mila
ला-मुतमइन है वो जिसे दिल खोल कर मिला
- Karal 'Maahi'
ला-मुतमइन
है
वो
जिसे
दिल
खोल
कर
मिला
'माही'
कहे
सुनो
है
कोई
हुन
सा
बद-नसीब
बैठे
बिठाए
दिल
ही
ने
यक-दम
कहा
मुझे
'माही'
ग़ज़ल
का
क़ाफ़िया
तू
चुन
सा
बद-नसीब
- Karal 'Maahi'
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जो
बीता
बाद
तेरे
एक
क़िस्सा
है
अधूरापन
मेरी
तन्हाइयों
का
एक
हिस्सा
है
अधूरापन
Karal 'Maahi'
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इश्क़
तस्बीह
में
शुमार
कर
लिया
बस
तिजारत
न
की
वक़ार
कर
लिया
आपके
नाम
वर्ण
जोड़
तोड़
कर
जो
कहा
वो
ग़ज़ल
क़रार
कर
लिया
दिल
जलाया
हुआ
धुआँ
धुआँ
धुआँ
और
फिर
राख
को
ग़ुबार
कर
लिया
आँख
दावा
करे
कि
दिल
न
दूँ
मगर
एक
इल्ज़ाम
है
फ़रार
कर
लिया
महफ़िलों
में
सुकून-ए-दिल
तलाश
कर
दर्द-ए-दिल
यार
दर-किनार
कर
लिया
सिर्फ़
उनवान
दे
दिया
"वकार"
और
नज़्म
को
आज
यादगार
कर
लिया
छोड़
'माही'
तू
इंतिज़ार
का
बुख़ार
ढोंग
तूने
ये
बार
बार
कर
लिया
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मिरे
देरी
से
आने
पर
दिखी
आँखों
से
गुर्राती
ठनी
बैठी
है
बन
मीठी-छुरी
इक
ना-समझ
लड़की
Karal 'Maahi'
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सुनी
को
अनसुना
करके
न
उस
सेे
कुछ
कहे
कोई
बिना
मेरे
अगर
वो
ख़ुश
रहे
तो
ख़ुश
रखे
कोई
अगर
नादानियाँ
कर
वो
चहक
उट्ठे
महक
उट्ठे
समझदारी
फिर
उस
पर
लादने
को
क्यूँँ
बके
कोई
कहीं
मुरझा
न
जाए
हार
कर
मासूम
का
चेहरा
कभी
घोड़ा
कभी
हाथी
कभी
बन्दर
बने
कोई
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Karal 'Maahi'
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भुला
क्यूँँ
नहीं
पा
रहा
मैं
ख़ुदाया
नुमायाँ
वो
पिस्तान
उन
पर
मिरे
लब
Karal 'Maahi'
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