ज़ाहिर न हो कभी कि सभी का रक़ीब हूँ

  - Karal 'Maahi'
ज़ाहिरहोकभीकिसभीकारक़ीबहूँ
फ़हमीयेठीकहैकिअधूरारक़ीबहूँ
जोशोर-ओ-ग़ुलमचाएमिरीसामेईनने
मेरेरक़ीबकहरहेउम्दारक़ीबहूँ
बाँकाकहानिभाकेरक़ाबतरक़ीबने
महबूबजानताहैछबीलारक़ीबहूँ
चर्चावोकररहेहैंकिचर्चातोकीजिए
महफ़िलमेंगयाइकअबूझारक़ीबहूँ
मयख़ानाख़ालीकरकेभीमैंबा-अदबचला
साक़ीसमझरहाथाकिबिगड़ारक़ीबहूँ
दरियाइकआगकाहैसर-ए-इश्क़येमिरा
गोआज़मामुझेमैंपुरानारक़ीबहूँ
फ़ितरतवतन-परस्तहैख़ौफ़-ए-सलीबक्या
रहमतकरनामुझपेतूपाशारक़ीबहूँ
मेरेहबीबहाल-ए-तबीअतकासोगछोड़
बज़्म-ए-रक़ीबकामैंचहीतारक़ीबहूँ
क्याकैफ़ियतबताऊँहैकैसाजुनून-ए-इश्क़
दिलहैखुलीक़िताबकुशादारक़ीबहूँ
  - Karal 'Maahi'
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