samundar ki kuchh kyoon se baat ki | समुंदर की कुछ बूंदों से बात की

  - Kamal Upadhyay
समुंदरकीकुछबूंदोंसेबातकी
वोभीअपनेवजूदकोलेकरव्याकुलहैं
विशालसमुंदरमेंकहाकोईउनकीहैसुनता
जबकिउनसेहीसमुंदरहै
उनकेबिनासमुंदरबसमरुस्थलहै
बूँदेंदिन-रातप्रयत्नकरतीहैं
एकबूँददूसरेकोआगेढकेलकर
समुंदरकावजूदक़ाएमरखतीहैं
उनकोएहसासहैअपनेहोनेका
लेकिन
समुंदरहरबारइसबातकोभूलजाताहै
सोचोंअगरबूँदेंविद्रोहकरदें
बनाकरदोस्तसूरजको
ऊपरआकाशमेंबादलसेमिलजाएँ
होसकताहैदोस्तीधरासेकरलें
उसकेगर्तमेंसमाजाएँ
सूखजाएगासमुंदर
बूंदोंकावजूदतोहमेशाबनारहेगा
समुंदरकोअभिमानकिसबातका
क्यापता
क्याउसेनहींपता
किसनेकियाउसकावजूदक़ाएम
मिटजाएगाएकदिन
बसबूंदोंकोक़दमविद्रोहकाउठानाहै
  - Kamal Upadhyay
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