gham ka juzdaan ho gaya hooñ main | ग़म का जुज़दान हो गया हूँ मैं

  - Kaleem Noori Firozabadi
ग़मकाजुज़दानहोगयाहूँमैं
अपनीपहचानहोगयाहूँमैं
ख़ुशबूएँबसगईंहैंरगरगमें
जैसेगुल-दानहोगयाहूँमैं
रोज़मुझमेंचिताएँजलतीहैं
एकशमशानहोगयाहूँमैं
कोईमुझकोसमझनहींपाता
इतनाआसानहोगयाहूँमैं
ठहरतीहीनहींकोईख़्वाहिश
क़स्र-ए-वीरानहोगयाहूँमैं
मेरीछोटीसीइकहुकूमतहै
जिसकासुलतानहोगयाहूँमैं
ढोरहाहूँमैंख़ुदकोकाँधोंपर
एकशमशानहोगयाहूँमैं
मुझकापत्थरसमझकेमततोड़ो
अबतोइंसानहोगयाहूँमैं
  - Kaleem Noori Firozabadi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy