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Kaleem Chughtai
hai naam to khurshed khan
hai naam to khurshed khan | है नाम तो ख़ुर्शेद ख़ाँ
- Kaleem Chughtai
है
नाम
तो
ख़ुर्शेद
ख़ाँ
कहते
हैं
सब
जल्दी
मियाँ
हर
काम
में
गड़बड़
करें
कमरों
में
वो
खड़बड़
करें
हैं
देर
से
वो
जागते
स्कूल
जाएँ
भागते
उस्ताद
जब
पूछें
सवाल
हो
जाएँ
फ़ौरन
वो
निढाल
बातों
का
उन
को
शौक़
है
कुश्ती
का
भी
कुछ
ज़ौक़
है
आशिक़
हैं
वो
फूटबाल
के
दुश्मन
हैं
रोटी
दाल
के
हलवा
मगर
मर्ग़ूब
है
और
चाय
भी
महबूब
है
इक
दिन
वो
जल्दी
में
चले
देखा
नहीं
था
सामने
केले
का
छलका
था
पड़ा
उस
पर
जो
पाँव
रख
दिया
फिस्ले
चुनाँचे
गिर
पड़े
और
दर्द
से
रोने
लगे
माँ
ने
उठाया
प्यार
से
बहलाया
फिर
चुम्कार
के
जल्दी
मियाँ
जब
चुप
हुए
अम्मी
लगीं
ये
पूछने
छिलका
ये
फेंका
किस
ने
याँ
सूझीं
किसे
नादानियाँ
जल्दी
मियाँ
का
सर
झुका
ताला
था
मुँह
पर
इक
लगा
जाता
न
था
उन
से
कहा
छिलका
तो
फेंका
मैं
ने
था
- Kaleem Chughtai
कमाता
हूँ
मैं
कितना
सोच
लेना
बाद
में
ये
सब
अभी
तो
बस
यही
काफ़ी
है
माँ
के
पास
रहता
हूँ
Tanoj Dadhich
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किताबों
से
निकल
कर
तितलियाँ
ग़ज़लें
सुनाती
हैं
टिफ़िन
रखती
है
मेरी
माँ
तो
बस्ता
मुस्कुराता
है
Siraj Faisal Khan
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मुझपे
पड़ती
नहीं
बलाओं
की
धूप
सर
पे
साया-फ़िगन
है
माँ
की
दु'आ
Amaan Haider
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एक
मुद्दत
से
मिरी
माँ
नहीं
सोई
'ताबिश'
मैं
ने
इक
बार
कहा
था
मुझे
डर
लगता
है
Abbas Tabish
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कल
अपने-आप
को
देखा
था
माँ
की
आँखों
में
ये
आईना
हमें
बूढ़ा
नहीं
बताता
है
Munawwar Rana
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चलती
फिरती
हुई
आँखों
से
अज़ाँ
देखी
है
मैं
ने
जन्नत
तो
नहीं
देखी
है
माँ
देखी
है
Munawwar Rana
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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आ
रही
है
जो
बहू
सीधी
रहे
माँ
चाहती
जा
रही
बेटी
मगर
चालाक
होनी
चाहिए
Tanoj Dadhich
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ये
मख़मली
गद्दे
तो
तुझको
ही
मुबारक
हों
ऐ
दोस्त
मुझे
बस
माँ
की
गोद
ही
काफ़ी
है
Harsh saxena
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