gham-e-dil hi gham-e-dauraan gham-e-jaanaana banta hai | ग़म-ए-दिल ही ग़म-ए-दौराँ ग़म-ए-जानाना बनता है

  - Kaleem Aajiz
ग़म-ए-दिलहीग़म-ए-दौराँग़म-ए-जानानाबनताहै
यहीग़मशे'रबनताहैयहीअफ़्सानाबनताहै
इसीसेगर्मी-ए-दार-ओ-रसनहैइंक़िलाबोंमें
बहारोंमेंयहीज़ुल्फ़-ओ-क़द-ए-जानानाबनताहै
सरोंकेख़ुमसुराहीगर्दनोंकीजामज़ख़्मोंके
मुहय्याजबयेहोलेतेहैंतबमय-ख़ानाबनताहै
बिगड़ताक्याहैपरवानेकाजलकरख़ाकहोनेमें
किफिरपरवानेहीकीख़ाकसेपरवानाबनताहै
निगाह-ए-कमसेमेरीचाक-दामानीकोमतदेखो
हज़ारोंहोशयारोंमेंकोईदीवानाबनताहै
ख़रीदाजानहींसकताहैसाक़ीज़र्फ़रिंदोंका
बहुतशीशेपिघलतेहैंतोइकपैमानाबनताहै
मिरेहीदोनोंहाथआतेहैंकामउनकेसँवरनेमें
दिखाताहैकोईआईनाकोईशानाबनताहै
बड़ासरमायाहैसबकुछलुटादेनामोहब्बतमें
फ़क़ीरानालिबासआतेहैंदिलशाहानाबनताहै
  - Kaleem Aajiz
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy