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"Nadeem khan' Kaavish"
sard mausam yuñ achaanak ho gaya
sard mausam yuñ achaanak ho gaya | सर्द मौसम यूँँ अचानक हो गया
- "Nadeem khan' Kaavish"
सर्द
मौसम
यूँँ
अचानक
हो
गया
चाँद-सूरज
लग
रहे
रूठे
हुए
- "Nadeem khan' Kaavish"
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सर्दी
में
दिन
सर्द
मिला
हर
मौसम
बेदर्द
मिला
ऊँचे
लम्बे
पेड़ों
का
पत्ता
पत्ता
ज़र्द
मिला
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Mohammad Alvi
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दूर
तक
छाए
थे
बादल
और
कहीं
साया
न
था
इस
तरह
बरसात
का
मौसम
कभी
आया
न
था
Qateel Shifai
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धूप
के
एक
ही
मौसम
ने
जिन्हें
तोड़
दिया
इतने
नाज़ुक
भी
ये
रिश्ते
न
बनाये
होते
Waseem Barelvi
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बहुत
बेकार
मौसम
है
मगर
कुछ
काम
करना
है
कि
ताज़ा
ज़ख़्म
मिलने
तक
पुराना
ज़ख़्म
भरना
है
Abbas Tabish
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जिस
मौसम
में
भीगना
है
हम
दोनों
को
उस
मौसम
में
पूछ
रही
हो
छाता
है
Zubair Alam
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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मैं
पहले
हारी
थी
इस
बार
हारने
की
नहीं
तू
जा
रहा
है
तो
जा
मैं
पुकारने
की
नहीं
मुझे
पहाड़ों
पे
मौसम
का
लुत्फ़
लेना
है
मैं
तेरे
कमरे
में
सर्दी
गुज़ारने
की
नहीं
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Mumtaz Naseem
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वो
आग
बुझी
तो
हमें
मौसम
ने
झिंझोड़ा
वर्ना
यही
लगता
था
कि
सर्दी
नहीं
आई
Khurram Afaq
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बदल
गए
मेरे
मौसम
तो
यार
अब
आए
ग़मों
ने
चाट
लिया
ग़म-गुसार
अब
आए
Farhat Abbas Shah
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तन्हा
होना,
गुमसुम
दिखना,
कुछ
ना
कहना...
ठीक
नहीं
अपने
ग़म
को
इतना
सहना,
इतना
सहना...
ठीक
नहीं
आओ
दिल
की
मिट्टी
में
कुछ
दिल
की
बातें
बो
दें
हम
बारिश
के
मौसम
में
गमले
ख़ाली
रहना...
ठीक
नहीं
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Dev Niranjan
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बताओ
इस
सेे
प्यारा
और
कोई
भी
ख़ुदा
है
क्या
मेरी
माँ
हर
किसी
के
बच्चे
को
बेटा
समझती
है
"Nadeem khan' Kaavish"
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ये
दुनिया
चल
रही
है
उस
ख़ुदा
के
इक
इशारे
पर
वो
चाहे
जो
अता
कर
दे,
वो
चाहे
तो
फ़ना
कर
दे
"Nadeem khan' Kaavish"
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ये
जिस
दुनिया
ने
मुझको
रोज़
जीते
जी
ही
मारा
था
ये
मेरी
क़ब्र
पर
क्यूँ
फूल
लेकर
आ
रही
है
अब
"Nadeem khan' Kaavish"
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मेरी
आँखों
में
भी
हैं
तस्वीर
उसकी
जी
इसके
अलावा
निशानी
नहीं
है
"Nadeem khan' Kaavish"
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जब
से
दिल
का
लगाना
हुआ
इक
गली
में
ठिकाना
हुआ
हम
तो
आँखों
से
मारे
गए
वज़ह
घूँघट
उठाना
हुआ
दिल
को
तन्हा
जो
सबने
किया
फिर
तेरा
आना-जाना
हुआ
लाख
कोशिश
की
हमने
मगर
दिल
तेरा
ही
दिवाना
हुआ
तेरी
यादों
के
साए
में
फिर
सिगरटों
का
जलाना
हुआ
अब
तो
हँसते
ही
रहते
हैं
हम
मुस्कुराए
ज़माना
हुआ
तुझको
छू
कर
के
बस
फिर
नदीम
इक
ग़ज़ल
गुनगुनाना
हुआ
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"Nadeem khan' Kaavish"
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