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"Nadeem khan' Kaavish"
saji thii udaasi ki mehfil jahaan
saji thii udaasi ki mehfil jahaan | सजी थी उदासी की महफ़िल जहाँ
- "Nadeem khan' Kaavish"
सजी
थी
उदासी
की
महफ़िल
जहाँ
वहाँ
पर
हमें
ही
बुलाया
गया
- "Nadeem khan' Kaavish"
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पहले
कहता
है
जुनूँ
उसका
गिरेबान
पकड़
फिर
मेरा
दिल
मुझे
कहता
है
इधर
कान
पकड़
ऐसी
वहशत
भी
न
हो
घर
के
दरो
बाम
कहें
कोई
आवाज़
ही
ले
आ
कोई
मेहमान
पकड़
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Azbar Safeer
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अदब
ता'लीम
का
जौहर
है
ज़ेवर
है
जवानी
का
वही
शागिर्द
हैं
जो
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Chakbast Brij Narayan
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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अदब
वाले
अदब
की
महफ़िलें
पहचान
लेते
हैं
उन्हें
तुम
प्यार
से
कुछ
भी
कहो
वो
मान
लेते
हैं
जहाँ
तक
देख
सकते
हैं
वहाँ
तक
सुन
नहीं
सकते
मगर
जब
इश्क़
हो
जाए
तो
धड़कन
जान
लेते
हैं
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Hameed Sarwar Bahraichi
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पहले-पहल
तो
लड़
लिए
अल्लाह
से
मगर
अब
पेश
आ
रहे
हैं
बड़ी
आजिज़ी
से
हम
Amaan Pathan
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अगर
लगता
है
वो
क़ाबिल
नहीं
है
तो
रिश्ता
तोड़ना
मुश्किल
नहीं
है
रक़ीब
आया
है
मेरे
शे'र
सुनने
तो
अब
ये
जंग
है
महफ़िल
नहीं
है
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Tanoj Dadhich
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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उसने
महफ़िल
से
उठाया
हमको
जिसको
पलकों
पे
बिठाया
हमने
Vishal Bagh
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एक
महफ़िल
में
कई
महफ़िलें
होती
हैं
शरीक
जिस
को
भी
पास
से
देखोगे
अकेला
होगा
Nida Fazli
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तिरे
सिवा
भी
कहीं
थी
पनाह
भूल
गए
निकल
के
हम
तिरी
महफ़िल
से
राह
भूल
गए
Majrooh Sultanpuri
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कहानी
सभी
को
पता
थी
मगर
थी
ख़्वाहिश
सभी
की
तमाशा
बने
"Nadeem khan' Kaavish"
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बिना
पापा
के
ये
घर
अब
मुझे
घर
ही
नहीं
लगता
नहीं
आता
य़कीं
तो
क़ब्र
कहती
है
य़कीं
है
अब?
"Nadeem khan' Kaavish"
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जानलेवा
है
ये
ज़िन्दगी
तो
बता
मौत
के
डर
से
हम
जीना
ही
छोड़
दें
"Nadeem khan' Kaavish"
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साढ़े
नौ
दिन
से
ज़रा
भी
आँख
झपकाई
नहीं
हैं
ये
मुहब्बत
हैं?
तुम्हारी
याद
की
ऐसी
की
तैसी
"Nadeem khan' Kaavish"
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हमारे
हाथ
में
कुछ
भी
नहीं
हैं
हमारा
हाथ
है
इस
काम
में
भी
"Nadeem khan' Kaavish"
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