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"Nadeem khan' Kaavish"
jaanleva hai ye zindagi to bataa
jaanleva hai ye zindagi to bataa | जानलेवा है ये ज़िन्दगी तो बता
- "Nadeem khan' Kaavish"
जानलेवा
है
ये
ज़िन्दगी
तो
बता
मौत
के
डर
से
हम
जीना
ही
छोड़
दें
- "Nadeem khan' Kaavish"
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हर
इक
सू
हैं
दर-ओ-दीवार
लेकिन
मुयस्सर
है
नहीं
घर-बार
लेकिन
Umrez Ali Haider
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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दर-ब-दर
ढूँढ़
रहे
हैं
जिसे
अरसे
से
हम
शख़्स
वो
मेरी
ही
आँखों
में
छिपा
बैठा
है
Harsh saxena
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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हम
मिल
के
आ
गए
मगर
अच्छा
नहीं
लगा
फिर
यूँँ
हुआ
असर
कि
घर
अच्छा
नहीं
लगा
इक
बार
दिल
में
तुझ
सेे
जुदाई
का
डर
बना
फिर
दूसरा
कोई
भी
डर
अच्छा
नहीं
लगा
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Shriyansh Qaabiz
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मुझे
ये
डर
है
तेरी
आरज़ू
न
मिट
जाए
बहुत
दिनों
से
तबीअत
मिरी
उदास
नहीं
Nasir Kazmi
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पहले
सौ
बार
इधर
और
उधर
देखा
है
तब
कहीं
डर
के
तुम्हें
एक
नज़र
देखा
है
Majrooh Sultanpuri
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दीवार-ओ-दर
पे
'कृष्णा'
की
लीला
के
नक़्श
है
मंदिर
है
ये
तो
'कृष्ण'
के
दरबार
की
तरह
Shobha Kukkal
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वो
एक
ही
शख़्स
यार
है
वो
एक
ही
से
है
बंदगी
वो
एक
ही
शख़्स
ग़ैर
है
वो
एक
ही
शख़्स
ज़िन्दगी
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"Nadeem khan' Kaavish"
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हमीं
थे
जो
क़िस्से
में
लाए
तुझे
हमीं
को
ये
क़िस्सा
सुनाया
गया
"Nadeem khan' Kaavish"
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हमारे
दिल
की
चाहत
थी,
नहीं
ना
तुझे
मुझ
सेे
मुहब्बत
थी,
नहीं
ना
बता
मेरी
जमा
तस्वीर
कोई,
कभी
तेरी
इबादत
थी,
नहीं
ना
कभी
पागल
हुए
मेरे
लिए
तुम
कभी
मिलने
की
हसरत
थी,नहीं
ना
हमेशा
मैं
ही
समझौता
करूँं
क्या
मुहब्बत
क्या
सियासत
थी,नहीं
ना
मिला
ना
अब
नज़र
को,
बोल
भी
कुछ
क़सम
है
बोल
उल्फ़त
थी,नहीं
ना
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"Nadeem khan' Kaavish"
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कैसे
बनेगी
बात
मेरी
सूनी
पड़ी
है
रात
मेरी
वो
दूसरी
दुनिया
में
ख़ुश
है
शर्मिंदा
है
औक़ात
मेरी
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"Nadeem khan' Kaavish"
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अजब
से
झूठ
कहता
हूँ
मैं
सब
से
झूठ
कहता
हूँ
किसी
ने
सच
नहीं
माना
तो
जब
से
झूठ
कहता
हूँ
वकीलों
से
भी
यारी
हैं
अदब
से
झूठ
कहता
हूँ
किया
था
इश्क़
मैंने
भी
सो
तब
से
झूठ
कहता
हूँ
यक़ीं
मत
कर
तू
ऐ
दुनिया
मैं
रब
से
झूठ
कहता
हूँ
मेरी
ये
बात
सच
है
बस
मैं
सब
से
झूठ
कहता
हूँ
तुझे
सबकुछ
बता
दूँ
क्या
कि
कब
से
झूठ
कहता
हूँ
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"Nadeem khan' Kaavish"
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