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"Nadeem khan' Kaavish"
hamse na poochho kis qadar mahroom hain ham log
hamse na poochho kis qadar mahroom hain ham log | हम सेे न पूछो किस क़दर महरूम हैं हम लोग
- "Nadeem khan' Kaavish"
हम
सेे
न
पूछो
किस
क़दर
महरूम
हैं
हम
लोग
हम
हर
किसी
बारात
को
मय्यत
समझते
हैं
- "Nadeem khan' Kaavish"
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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रफ़्ता
रफ़्ता
सब
कुछ
समझ
गया
हूँ
मैं
लोग
अचानक
टैरेस
से
क्यूँ
कूद
गए
Shadab Asghar
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मत
सहल
हमें
जानो
फिरता
है
फ़लक
बरसों
तब
ख़ाक
के
पर्दे
से
इंसान
निकलते
हैं
Meer Taqi Meer
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ठहाका
मार
कर
हथियार
हँसते
नहीं
जीतेंगे
अब
इंसान
हम
सेे
Umesh Maurya
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बस-कि
दुश्वार
है
हर
काम
का
आसाँ
होना
आदमी
को
भी
मुयस्सर
नहीं
इंसाँ
होना
Mirza Ghalib
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हम
तो
सुनते
थे
कि
मिल
जाते
हैं
बिछड़े
हुए
लोग
तू
जो
बिछड़ा
है
तो
क्या
वक़्त
ने
गर्दिश
नहीं
की
Ambreen Haseeb Ambar
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फ़ुज़ूल-ख़र्ची
नहीं
करेंगे
Rehman Faris
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समझ
से
काम
जो
लेता
हर
एक
बशर
'ताबाँ'
न
हाहा-कार
ही
मचते
न
घर
जला
करते
Anwar Taban
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आप
की
सादा-दिली
से
तंग
आ
जाता
हूँ
मैं
मेरे
दिल
में
रह
चुके
हैं
इस
क़दर
हुश्यार
लोग
Nomaan Shauque
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समुंदर
में
भी
वो
रवानी
नहीं
है
डुबो
दे
ये
इतना
भी
पानी
नहीं
है
मेरी
आँखों
में
भी
हैं
तस्वीर
उसकी
जी
इसके
अलावा
निशानी
नहीं
है
हमारी
कहानी
थी
अपनी
हक़ीक़त
हक़ीक़त
में
कोई
कहानी
नहीं
है
हुआ
इस
तरह
से
फ़ना
ये
जहाँ
भी
है
राजा
तो
महफ़ूज़
रानी
नहीं
है
मुहब्बत-वुहब्बत
से
तौबा
हमारी
हाँ
वो
भी
किसी
की
दिवानी
नहीं
है
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"Nadeem khan' Kaavish"
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नई
जान
हमको
मिली
शा'इरी
से
अलग
शान
हमको
मिली
शा'इरी
से
कोई
जानता
ही
नहीं
था
हमें
तो
ये
पहचान
हमको
मिली
शा'इरी
से
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"Nadeem khan' Kaavish"
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सर्द
मौसम
यूँँ
अचानक
हो
गया
चाँद-सूरज
लग
रहे
रूठे
हुए
"Nadeem khan' Kaavish"
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मैं
उसकी
बातों
में
आ
रहा
हूँ
वो
मेरी
बातों
में
आ
रही
है
"Nadeem khan' Kaavish"
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मुझको
भी
अपनी
आँख
में
भर
के
दिखाओ
ना
आसान
हैं
जो
इश्क़
तो
कर
के
दिखाओ
ना
कैसे
यक़ीं
करूँँ
मैं
कि
तुझको
भी
इश्क़
है
गर
इश्क़
है
तो
हद
से
गुज़र
के
दिखाओ
ना
वो
ख़ूब
जानती
है
हुनर
दिल
में
रहने
का
है
दम
तो
मेरे
दिल
में
उतर
के
दिखाओ
ना
कहती
थी
मर
ही
जाना
है
तुम
सेे
बिछड़
के
तो
लो
हो
गए
अलग
ज़रा
मर
के
दिखाओ
ना
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"Nadeem khan' Kaavish"
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