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"Nadeem khan' Kaavish"
apni pyaas bujhaani thii
apni pyaas bujhaani thii | अपनी प्यास बुझानी थी
- "Nadeem khan' Kaavish"
अपनी
प्यास
बुझानी
थी
मैंने
फूल
मसल
डाला
- "Nadeem khan' Kaavish"
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
ना
थे
तुम
अगर
फूल
ना
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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हम
इक
ही
लौ
में
जलाते
रहे
ग़ज़ल
अपनी
नई
हवा
से
बचाते
रहे
ग़ज़ल
अपनी
दरअस्ल
उसको
फ़क़त
चाय
ख़त्म
करनी
थी
हम
उसके
कप
को
सुनाते
रहे
ग़ज़ल
अपनी
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Zubair Ali Tabish
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जहाँ
सारे
हवा
बनने
की
कोशिश
कर
रहे
थे
वहाँ
भी
हम
दिया
बनने
की
कोशिश
कर
रहे
थे
Abbas Qamar
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इसे
तो
वक़्त
की
आब-ओ-हवा
ही
ठीक
कर
देगी
मियाँ
नासूर
होते
ज़ख़्म
सहलाया
नहीं
करते
shaan manral
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दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
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Kafeel Rana
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लम्स
उसका
इस
क़दर
महसूस
होता
है
मुझे
हो
कोई
नाराज़
तितली
फूल
पर
बैठी
हुई
फ़िल्म
में
शायद
बिछड़ने
का
कोई
अब
सीन
है
और
मेरे
हाथ
को
वो
थाम
कर
बैठी
हुई
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Sunny Seher
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मैं
अपनी
हिजरत
का
हाल
लगभग
बता
चुका
था
सभी
को
और
बस
तिरे
मोहल्ले
के
सारे
लड़के
हवा
बनाने
में
लग
गए
थे
Vikram Gaur Vairagi
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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मैं
जिसे
ओढ़ता
बिछाता
हूँ
वो
ग़ज़ल
आप
को
सुनाता
हूँ
एक
जंगल
है
तेरी
आँखों
में
मैं
जहाँ
राह
भूल
जाता
हूँ
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Dushyant Kumar
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तुझे
भूल
जाने
की
कोशिशें
कभी
कामयाब
न
हो
सकीं
तिरी
याद
शाख़-ए-गुलाब
है
जो
हवा
चली
तो
लचक
गई
Bashir Badr
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कई
रास्तों
की
थकन
है
बदन
में
मैं
मंज़िल
पे
आकर
भी
पछता
रहा
हूँ
"Nadeem khan' Kaavish"
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मुद्दत
के
बाद
घर
की
तरफ़
लौटना
हुआ
देखा
तो
जाना,
घर
से
मेरे
घर
निकल
गया
"Nadeem khan' Kaavish"
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इक
अधूरी
शाम
का
हिस्सा
हूँ
मैं
ख़ुद
को
पाने
ख़ुद
ही
अब
निकला
हूँ
मैं
तुझको
आँखों
से
शिक़ायत
है
तो
सुन
आइने
में
भी
नहीं
दिखता
हूँ
मैं
अपने
प्यासे
दिल
की
ठंडक
के
लिए
यार
इक
दरिया
जला
आया
हूँ
मैं
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"Nadeem khan' Kaavish"
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अगर
तुम
साथ
होते
तो
ये
दुनिया
जीत
लेता
मैं
तुम्हारे
बाद
मुझको
बस
ज़रूरत
पूरी
करनी
है
"Nadeem khan' Kaavish"
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यहाँ
हर
शख़्स
रहता
है
गुमाँ
में
बहुत
दुश्वारियाँ
है
इस
जहाँ
में
बहुत
हैरत
से
चारों
ओर
देखा
है
मेरा
घर
नहीं
मेरे
मकाँ
में
इसी
उम्मीद
पे
ज़िंदा
रहे
हम
कि
तुम
सेे
फिर
मिलेंगे
आसमाँ
में
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"Nadeem khan' Kaavish"
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