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"Nadeem khan' Kaavish"
sabhi se yaar ulfat hai
sabhi se yaar ulfat hai | सभी से यार उल्फ़त है
- "Nadeem khan' Kaavish"
सभी
से
यार
उल्फ़त
है
ये
कितनी
गंदी
आदत
है
ज़रा
सोचो
कि
मेरा
दिल
सभी
का
है
सियासत
है
मुझे
पहले
ये
लगता
था
मुहब्बत
ही
इबादत
है
वो
शायर
दिल
की
लड़की
है
मुझे
उस
पर
भी
लानत
है
यही
इक
बात
कहनी
है
मुहब्बत
से
मुहब्बत
है
मुझे
अब
शर्म
आती
है
मुझे
बेहद
ही
हैरत
है
- "Nadeem khan' Kaavish"
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पहले
थोड़ी
मुश्किल
होगी
आगे
लेकिन
मंज़िल
होगी
सब
बाराती
शायर
होंगे
मेरी
शादी
महफ़िल
होगी
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Tanoj Dadhich
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किसी
बहाने
से
उसकी
नाराज़गी
ख़त्म
तो
करनी
थी
उसके
पसंदीदा
शाइर
के
शे'र
उसे
भिजवाए
हैं
Ali Zaryoun
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हर
एक
लफ़्ज़
के
तेवर
ही
और
होते
हैं
तेरे
नगर
के
सुख़न-वर
ही
और
होते
हैं
तुम्हारी
आँखों
में
वो
बात
ही
नहीं
ऐ
दोस्त
डुबोने
वाले
समुंदर
ही
और
होते
हैं
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Abrar Kashif
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अच्छे
शे'र
सुनाने
वाले
लड़के
सुन
अच्छे
शायर
तन्हा
ही
रह
जाते
हैं
Ritesh Rajwada
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तेरे
बग़ैर
भी
जी
कर
दिखा
दिया
मैंने
दुआएँ
दे
तुझे
शाइर
बना
दिया
मैंने
Anjum Rehbar
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वो
शख़्स
काश
अपना
शौहर
बनाता
मुझको
जिस
शख़्स
के
ग़मों
ने
शायर
बना
रखा
है
Harsh saxena
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ज़िंदगी
पर
इस
से
बढ़
कर
तंज़
क्या
होगा
'फ़राज़'
उस
का
ये
कहना
कि
तू
शाएर
है
दीवाना
नहीं
Ahmad Faraz
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इतना
आसान
नहीं
होता
है
शायर
कहलाना
दर्दों
को
कहने
से
पहले
सहना
भी
पड़ता
है
Harsh saxena
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देखो
तुम
ने
इश्क़
किया
है
शायर
से
शे'र
कहेगा
ज़ेवर
थोड़ी
ला
देगा
Kumar Kaushal
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वो
पूछते
फिरते
हैं
मेरे
बारे
में
सब
सेे
इक
मेरा
भी
शायर
है
उसे
तुमने
सुना
क्या?
Nawaz Deobandi
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कैसे
बनेगी
बात
मेरी
सूनी
पड़ी
है
रात
मेरी
वो
दूसरी
दुनिया
में
ख़ुश
है
शर्मिंदा
है
औक़ात
मेरी
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"Nadeem khan' Kaavish"
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हम
सेे
न
पूछो
किस
क़दर
महरूम
हैं
हम
लोग
हम
हर
किसी
बारात
को
मय्यत
समझते
हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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इक
अधूरी
शाम
का
हिस्सा
हूँ
मैं
ख़ुद
को
पाने
ख़ुद
ही
अब
निकला
हूँ
मैं
तुझको
आँखों
से
शिक़ायत
है
तो
सुन
आइने
में
भी
नहीं
दिखता
हूँ
मैं
अपने
प्यासे
दिल
की
ठंडक
के
लिए
यार
इक
दरिया
जला
आया
हूँ
मैं
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"Nadeem khan' Kaavish"
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बर्बाद
ख़ुद
से
ख़ुद
की
ही
ये
ज़िंदगी
हुई
फिर
उसके
बाद
मौत
पे
ही
शा'इरी
हुई
पहले-पहल
तो
इश्क़
में
ख़ुद
को
ख़ुशी
हुई
अंजाम-ए-इश्क़
ये
हुआ
फिर
ख़ुद
कुशी
हुई
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"Nadeem khan' Kaavish"
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अँधेरी
रात
में
अक्सर
ही
जुगनू
याद
आते
हैं
अगर
हम
रोते
हैं
तो
तेरे
आँसू
याद
आते
हैं
ज़माने
बीत
जाते
हैं
किसी
की
याद
में
'काविश'
जिसे
आना
नहीं
होता
वही
क्यूँँ
याद
आते
हैं
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"Nadeem khan' Kaavish"
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