bina manzil ke koi raasta achha nahin lagta | बिना मंज़िल के कोई रास्ता अच्छा नहीं लगता

  - "Nadeem khan' Kaavish"
बिनामंज़िलकेकोईरास्ताअच्छानहींलगता
किसीकेदिलसेयानीखेलनाअच्छानहींलगता
गुज़रतीहैंकईरातेंउसीकीयादमेंलेकिन
कभीइकपलभीउसकोसोचनाअच्छानहींलगता
तेरीआवाज़सुनतेहीख़ुशीसेरोनेलगतीथी
हमेंउसमाँकाभीअबबोलनाअच्छानहींलगता
किसीनेआँखोंसेआँखेंमिलाकरयेकहामुझसेे
हमारेबीचमेंयेआईनाअच्छानहींलगता
गुज़श्तासालऐसेहादसेकीज़दमेंथा'काविश'
किइसकेबादमुझकोवोख़ुदाअच्छानहींलगता
  - "Nadeem khan' Kaavish"
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