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Kaifi Azmi
patthar ke KHuda vahaañ bhi paa.e
patthar ke KHuda vahaañ bhi paa.e | पत्थर के ख़ुदा वहाँ भी पाए
- Kaifi Azmi
पत्थर
के
ख़ुदा
वहाँ
भी
पाए
हम
चाँद
से
आज
लौट
आए
दीवारें
तो
हर
तरफ़
खड़ी
हैं
क्या
हो
गए
मेहरबान
साए
जंगल
की
हवाएँ
आ
रही
हैं
काग़ज़
का
ये
शहर
उड़
न
जाए
लैला
ने
नया
जनम
लिया
है
है
क़ैस
कोई
जो
दिल
लगाए
है
आज
ज़मीं
का
ग़ुस्ल-ए-सेह्हत
जिस
दिल
में
हो
जितना
ख़ून
लाए
सहरा
सहरा
लहू
के
खे़
में
फिर
प्यासे
लब-ए-फ़ुरात
आए
- Kaifi Azmi
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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दिल
आज
शाम
से
ही
उसे
ढूँडने
लगा
कल
जिस
के
बा'द
कमरे
में
तन्हाई
आई
थी
Ammar Iqbal
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दोस्त
ने
दिल
को
तोड़
के
नक़्श-ए-वफ़ा
मिटा
दिया
समझे
थे
हम
जिसे
ख़लील
काबा
उसी
ने
ढा
दिया
Arzoo Lakhnavi
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कहानी
भी
नहीं
है
दिल
में
कोई
सो
कुछ
भी
इन
दिनों
अच्छा
नहीं
है
मैं
अब
उकता
गया
हूँ
ज़िन्दगी
से
मेरा
जी
अब
कहीं
लगता
नहीं
है
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Ritesh Rajwada
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गले
मिलना
न
मिलना
तो
तेरी
मर्ज़ी
है
लेकिन
तेरे
चेहरे
से
लगता
है
तेरा
दिल
कर
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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जैसे
तू
हुक्म
करे
दिल
मिरा
वैसे
धड़के
ये
घड़ी
तेरे
इशारों
से
मिला
रक्खी
है
Anwar Masood
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मैं
जब
सो
जाऊँ
इन
आँखों
पे
अपने
होंट
रख
देना
यक़ीं
आ
जाएगा
पलकों
तले
भी
दिल
धड़कता
है
Bashir Badr
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हर
दुख
का
है
इलाज,
उसे
देखते
रहो
सबकुछ
भुला
के
आज
उसे
देखते
रहो
देखा
उसे
तो
दिल
ने
ये
बे-साख़्ता
कहा
छोड़ो
ये
काम
काज
उसे
देखते
रहो
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Aslam Rashid
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दिल
हारने
के
बाद
ही
आता
है
ये
सुख़न
अब
तक
किसी
ने
कोख
से
शायर
नहीं
जना
Anas Khan
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दिल
में
न
हो
जुरअत
तो
मोहब्बत
नहीं
मिलती
ख़ैरात
में
इतनी
बड़ी
दौलत
नहीं
मिलती
Nida Fazli
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तुम
इतना
जो
मुस्कुरा
रहे
हो
क्या
ग़म
है
जिस
को
छुपा
रहे
हो
आँखों
में
नमी
हँसी
लबों
पर
क्या
हाल
है
क्या
दिखा
रहे
हो
बन
जाएँगे
ज़हर
पीते
पीते
ये
अश्क
जो
पीते
जा
रहे
हो
जिन
ज़ख़्मों
को
वक़्त
भर
चला
है
तुम
क्यूँँ
उन्हें
छेड़े
जा
रहे
हो
रेखाओं
का
खेल
है
मुक़द्दर
रेखाओं
से
मात
खा
रहे
हो
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Kaifi Azmi
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पत्थर
के
ख़ुदा
वहाँ
भी
पाए
हम
चाँद
से
आज
लौट
आए
दीवारें
तो
हर
तरफ़
खड़ी
हैं
क्या
हो
गए
मेहरबान
साए
जंगल
की
हवाएँ
आ
रही
हैं
काग़ज़
का
ये
शहर
उड़
न
जाए
लैला
ने
नया
जनम
लिया
है
है
क़ैस
कोई
जो
दिल
लगाए
है
आज
ज़मीं
का
ग़ुस्ल-ए-सेह्हत
जिस
दिल
में
हो
जितना
ख़ून
लाए
सहरा
सहरा
लहू
के
खे़
में
फिर
प्यासे
लब-ए-फ़ुरात
आए
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Kaifi Azmi
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जो
वो
मिरे
न
रहे
मैं
भी
कब
किसी
का
रहा
बिछड़
के
उन
से
सलीक़ा
न
ज़िंदगी
का
रहा
लबों
से
उड़
गया
जुगनू
की
तरह
नाम
उस
का
सहारा
अब
मिरे
घर
में
न
रौशनी
का
रहा
गुज़रने
को
तो
हज़ारों
ही
क़ाफ़िले
गुज़रे
ज़मीं
पे
नक़्श-ए-क़दम
बस
किसी
किसी
का
रहा
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Kaifi Azmi
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झुकी
झुकी
सी
नज़र
बे-क़रार
है
कि
नहीं
दबा
दबा
सा
सही
दिल
में
प्यार
है
कि
नहीं
Kaifi Azmi
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तुम
इतना
जो
मुस्कुरा
रहे
हो
क्या
ग़म
है
जिस
को
छुपा
रहे
हो
आँखों
में
नमी
हँसी
लबों
पर
क्या
हाल
है
क्या
दिखा
रहे
हो
बन
जाएँगे
ज़हर
पीते
पीते
ये
अश्क
जो
पीते
जा
रहे
हो
जिन
ज़ख़्मों
को
वक़्त
भर
चला
है
तुम
क्यूँँ
उन्हें
छेड़े
जा
रहे
हो
रेखाओं
का
खेल
है
मुक़द्दर
रेखाओं
से
मात
खा
रहे
हो
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Kaifi Azmi
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