phir mausam-e-yakh-basta badlne ki khabar de | फिर मौसम-ए-यख़-बस्ता बदलने की ख़बर दे

  - Kahkashan Tabassum
फिरमौसम-ए-यख़-बस्ताबदलनेकीख़बरदे
रगरगमेंजमीबर्फ़पिघलनेकीख़बरदे
यादिलकेचराग़ोंकोलहूऔरअताकर
याराहमेंफिरचाँदनिकलनेकीख़बरदे
यामौसम-ए-ख़ुश-रंगकोईभेजज़मींपर
यागर्दिश-ए-अफ़्लाकबदलनेकीख़बरदे
बसउड़तेबगूलेहैंसराबोंकेसफ़रमें
एड़ीकोईचश्मेंकेउबलनेकीख़बरदे
दरबंदकिएलोगघरोंमेंहैंमुक़य्यद
आसेब-ज़दारातकेढलनेकीख़बरदे
भीगीहुइलकड़ीहूँधुआँदेतीहूँपहरों
अबमुझकोमिरीआगमेंजलनेकीख़बरदे
अख़बारभीदहशतकातराशाहै'तबस्सुम'
हरसुब्हफ़क़तदिलकेदहलनेकीख़बरदे
  - Kahkashan Tabassum
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