ab tak guzaari kaise shab-e-intizaar men | अब तक गुज़ारी कैसे शब-ए-इंतिज़ार में

  - Anand Sharma
अबतकगुज़ारीकैसेशब-ए-इंतिज़ारमें
मुश्किलहैकुछबतानाअभीइसग़ुबारमें
दोचारहमभीकहदेंइजाज़तमिलेअगर
जोभीगिलेहैंबाक़ीदिल-ए-दाग़दारमें
मरनेकीफ़िक्रमेंजोलड़ेहीनहींकभी
उनकीभीक़ब्रेंहमकोमिलीहैंदयारमें
साक़ीनेहदसेबढ़केनिभादीहैदोस्ती
कुछजामरखदिएहैंहमारीमज़ारमें
बाज़ारमेंअलगहैतवाइफ़कीआरज़ू
जोघरमेंहैबताईहैघरकेक़रारमें
राह-ए-सुख़नमेंकहनाज़राऔरबातहै
मरताहैकौनवर्नाकिसीकेभीप्यारमें
मिटतानहींवुजूदक़यामतकेबादभी
कितनेहीमिटगएहैंइसीएतिबारमें
  - Anand Sharma
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