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'June' Sahab Barelvi
har haseen chehra nihaara jaayega
har haseen chehra nihaara jaayega | हर हसीं चेहरा निहारा जाएगा
- 'June' Sahab Barelvi
हर
हसीं
चेहरा
निहारा
जाएगा
आख़िरत
होगी
तो
देखा
जाएगा
दफ़्न
सीने
में
सभी
ग़म
कर
लिए
हम
से
यारो
अब
न
रोया
जाएगा
सच
को
सच
समझो
वगरना
एक
दिन
झूट
ही
को
सच
बताया
जाएगा
वो
गई
और
दे
गई
बेचैनियाँ
मुज़्तरिब
बे-मौत
मारा
जाएगा
राम
जी
और
श्याम
जी
का
हर
पहर
नाम
लीजे
काम
बनता
जाएगा
चलते
चलते
आ
गया
चौराहे
पर
किस
तरफ़
जाने
ये
रस्ता
जाएगा
- 'June' Sahab Barelvi
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मेरे
ग़म
को
भी
जान
पाती
तुम
दिल
न
औरों
से
फिर
लगाती
तुम
ख़ैरियत
पूछनी
थी
मुझ
सेे
तो
मेरे
दिल
के
क़रीब
आती
तुम
मेरी
नींदों
का
रुख़
भी
करती
अगर
बिखरे
ख़्वाबों
को
फिर
सजाती
तुम
उड़ती
पेड़ों
से
जब
कोई
चिड़िया
उसके
बदले
में
चहचहाती
तुम
कोई
तो
है
वहॉं
मिरे
जैसा
यूँँॅं
मुझे
फिर
न
भूल
जाती
तुम
होता
जब
ज़िक्र-ए-जू'न
महफ़िल
में
मेरी
ग़ज़लों
को
गुनगुनाती
तुम
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बोलकर
ज़ाया'
हर
बात
करते
रहे
तेरी
ये
मेरी
ये
ज़ात
करते
रहे
बातों
बातों
में
इक
शे'र
ऐसा
कहा
लोग
क्या
बात
क्या
बात
करते
रहे
बे-वजह
इक
हसीं
आके
पल्ले
पड़ी
जाने
क्या
क्या
ख़ुराफ़ात
करते
रहे
है
तराशा
बदन
चेहरा
भी
नूर
सा
रात
भर
बस
सवालात
करते
रहे
बाँहों
में
बाँहें
डाले
हैं
दोनों
मगर
चाँद
तारों
की
हम
बात
करते
रहे
इश्क़
करके
फ़ना
हम
कुछ
ऐसे
हुए
ठीक
दिन
रात
हालात
करते
रहे
जू'न
से
ही
तो
बस
प्यार
उनको
न
था
बाक़ियों
पर
भी
बरसात
करते
रहे
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नई
नस्लों
ने
ठाना
है
कमाना
है
उड़ाना
है
जिसे
तुम
हॅंस
के
सुनते
हो
शब-ए-ग़म
का
फ़साना
है
मिरा
फ़र्त-ए-जुनूँ
तो
बस
हर
इक
वा'दा
निभाना
है
मुहब्बत,
यानी
सरसों
को
हथेली
पर
उगाना
है
सुपुर्द-ए-ख़ाक
होने
तक
अब
इस
तन
को
बचाना
है
बसर
अब
ज़िंदगी
हो
'जून'
यहॉं
से
जल्दी
जाना
है
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तिरे
मिलने
की
ख़्वाहिश
और
हफ़्ता
ख़्वार
हो
जाना
मुझे
सब
याद
है
वो
पीर
से
इतवार
हो
जाना
'June' Sahab Barelvi
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समाँ
ये
हसीं
है
मुबारक
मुबारक
बड़ा
दिल-नशीं
है
मुबारक
मुबारक
वो
छोड़ेगा
मुझको
बहुत
पास
आकर
मुझे
अब
यक़ीं
है
मुबारक
मुबारक
छुपेंगे
कहाँ
लोग
अब
साँप
बनकर
मिरी
आस्तीं
है
मुबारक
मुबारक
मैं
कहता
था
कल
तक
जिसे
सिर्फ़
अपना
वो
मेरा
नहीं
है
मुबारक
मुबारक
ये
पूछा
है
उसने
के
जून
अब
कहाँ
हो
वहीं
था
वहीं
है
मुबारक
मुबारक
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