kategi zindagi kaise mirii in dukh ke haalon men | कटेगी ज़िन्दगी कैसे मिरी इन दुख के हालों में

  - Simranjit Singh
कटेगीज़िन्दगीकैसेमिरीइनदुखकेहालोंमें
कोईबदलावनइपायागुज़रेचारसालोंमें
चमककरइनअँधेरोंमेंज़यादाइठलामतप्यारे
कभीरोशननहींहोपातेजुगनूतेज़उजालोंमें
मुहब्बतमेंअदालतकीतरहहोजाताहैजीवन
फंसारहताहैबंदाबसदलीलोंऔरसवालोंमें
सियासतमेंबढ़ादीजातीहैबसऐशअमीरोंकी
सताएफिक्ररोटीकीगरीबोंकोख़यालोंमें
हमारारुतबाहोगाएकदिनपूरेजहाँमें'जीत'
छपेंगेशे'रअपनेभीकईउम्दारिसालोंमें
  - Simranjit Singh
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