kiya ta'ajjub ki mirii rooh-e-ravaan tak pahunchen | किया तअज्जुब कि मिरी रूह-ए-रवाँ तक पहुँचे

  - Jigar Moradabadi
कियातअज्जुबकिमिरीरूह-ए-रवाँतकपहुँचे
पहलेकोईमिरेनग़्मोंकीज़बाँतकपहुँचे
जबहरइकशोरिश-ए-ग़मज़ब्त-ए-फ़ुग़ाँतकपहुँचे
फिरख़ुदाजानेयेहंगामाकहाँतकपहुँचे
आँखतकदिलसेआएज़बाँतकपहुँचे
बातजिसकीहैउसीआफ़त-ए-जाँतकपहुँचे
तूजहाँपरथाबहुतपहलेवहींआजभीहै
देखरिंदान-ए-ख़ुश-अन्फ़ासकहाँतकपहुँचे
जोज़मानेकोबुराकहतेहैंख़ुदहैंवोबुरे
काशयेबाततिरेगोश-ए-गिराँतकपहुँचे
बढ़केरिंदोंनेक़दमहज़रत-ए-वाइज़केलिए
गिरतेपड़तेजोदर-ए-पीर-ए-मुग़ाँतकपहुँचे
तूमिरेहाल-ए-परेशाँपेबहुततंज़कर
अपनेगेसूभीज़रादेखकहाँतकपहुँचे
उनकाजोफ़र्ज़हैवोअहल-ए-सियासतजानें
मेरापैग़ाममोहब्बतहैजहाँतकपहुँचे
इश्क़कीचोटदिखानेमेंकहींआतीहै
कुछइशारेथेकिजोलफ़्ज़-ओ-बयाँतकपहुँचे
जल्वेबेताबथेजोपर्दा-ए-फ़ितरतमें'जिगर'
ख़ुदतड़पकरमिरीचश्म-ए-निगराँतकपहुँचे
  - Jigar Moradabadi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy