gham-e-jahaan se main ukta gaya to kya hogaa | ग़म-ए-जहाँ से मैं उकता गया तो क्या होगा

  - Jawwad Sheikh
ग़म-ए-जहाँसेमैंउकतागयातोक्याहोगा
ख़ुदअपनीफ़िक्रमेंघुलनेलगातोक्याहोगा
येना-गुज़ीरहैउम्मीदकीनुमूकेलिए
गुज़रतावक़्तकहींथमगयातोक्याहोगा
यहीबहुतहैकिहमकोसुकूँसेजीनेदे
किसीकेहाथोंहमाराभलातोक्याहोगा
येलोगमेरीख़मोशीपेमुझसेनालाँहैं
कोईयेपूछेमैंगोयाहुआतोक्याहोगा
मैंइसलिएभीबहुतमुख़्तलिफ़हूँलोगोंसे
वोसोचतेहैंकिऐसाहुआतोक्याहोगा
जुनूँकीराहअजबहैकिपाँवधरनेको
ज़मीनतकभीनहींनक़्श-ए-पातोक्याहोगा
येएकख़ौफ़भीमेरीख़ुशीमेंशामिलहै
तिराभीध्यानअगरहटगयातोक्याहोगा
जोहोरहाहैवोहोताचलागयातोफिर?
जोहोनेकोहैवहीहोगयातोक्याहोगा
  - Jawwad Sheikh
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