ek shaamus ne mujhe apni panaah-gaah se baahar nikala | एक शाम

  - Jawaz Jafri
एकशाम
उसनेमुझेअपनीपनाह-गाहसेबाहरनिकाला
औरअपनेसरसब्ज़बाज़ुओंकेशहतूतसे
कश्तीतय्यारकी
कश्तीजिसनेसबसेपहले
दूसराकिनाराईजादकियाथा
आसमानपरचाँद
आधीमसाफ़ततयकरचुका
तोवोमुझेअपनीनईकश्तीमेंबिठाकर
समुंदरकीतहमेंउतरनेलगी
जहाँउसने
अपनेख़्वाबछुपारक्खेथे
अगलीशाम
वोमुझेएरोज़नकेमा'बदमेंमिली
जिसकेचारोंओर
सियाहजंगलकीबाढ़थी
उसमा'बदकोसारारोम
उम्मीदभरीनज़रोंसेदेखताथा
मैं
हातिफ़केग़ैब-दानोंकेलिए
भुनाहवागोश्त
खुशबू-दारमसाले
रोग़नियात
और
ज़ैतूनकीताज़ाशाख़था
में
मुक़द्दसअहातेमें
पनाह-गुज़ींहवा
उसेदेखकर
हातिफ़कीज़ियारत-गाहकीदीवार
शक़होगई
  - Jawaz Jafri
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy