chhatti baar | छटी बार

  - Jawaz Jafri
छटीबार
वोदजला-ओ-फ़ुरातकेदरमियान
मीनारा-ए-बाबुलकेसाएमें
मुझपरमुन्कशिफ़होई
वोमुक़द्दसमीनारकीसातवींमंज़िलपरबैठी
आयत-दर-आयतबिखरेसितारोंकी
तिलावतपरमामूरथी
वोअशतारकेमा'बदकेशुमालमेंसाएबाँटते
बाग़ात-ए-मुअ'ल्लक़ाको
बार-आवरीकीदु'आदेनेआईथी
उसकाबे-नियाज़जिस्म
उनहाथोंकीना-रसाईकोपहचानताथा
जोउसेछूनेकीतमन्नामें
ज़ेर-ए-क़बाजलरहेथे
मैंनेदोलश्करोंकेदरमियान
अपनेदादाकेरजज़मेंकलामकिया
जिसकीमुट्ठीमेंक़बीलेकीआबरूथी
मेरेअक़बमेंहरेजिस्मोंवालीऔरतें
आसमानीदफ़कीलयपर
मौतकातरानागानेलगीं
मेरानजीबुत-तरफ़ैनघोड़ा
जिसकाशजरा
मेरीउँगलियोंकीपोरोंपररक़मथा
औरजिसेमैंअपनीऔलादसेभीअज़ीज़जानताथा
मैंनेउसकीज़ीनमेंबैठनेसेइंकारकिया
औरहवापरपाँवरखताहुआ
दुश्मनकेक़ल्ब-ए-लश्करतकजापहुँचा
मुझेदेखकर
सूरमाओंकीआँखें
नाफ़तकफैलगईं
मैंज़ेर-ए-लब
अपनाशजरा-ए-नसबदोहरारहाथा
मैंनेअपनेपाँवमेंभागतेख़ूनको
महमेज़दी
औरअपनीज़हरमेंबुझीतलवार
मैदान-ए-जंगकेदरमियानगाड़दी
जिसकेमुरस्सादस्तेपर
ज़ैतूनकाअख़ुवाफूटपड़ा
मैंअपनीगुज़िश्ताज़िंदगीपर
कफ़-ए-अफ़्सोसमलनेलगा
  - Jawaz Jafri
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