ham khizaan ki ghudood. se chal kar | हम ख़िज़ाँ की ग़ुदूद से चल कर

  - Jawayd Anwar
हमख़िज़ाँकीग़ुदूदसेचलकर
ख़ुददिसम्बरकीकोखतकआए
हमकोफ़ुटपाथपरहयातमिली
हमपतंगोंपेलेटकररोए
सूरजोंनेहमारेहोंटोंपर
अपनेहोंटोंकाशहदटपकाया
औरहमारीशिकमतसल्लीको
जूनकीछातियोंमेंदूधआया
बर्फ़बिस्तरबनीहमारेलिए
औरदोज़ख़केसुर्ख़रेशमसे
हमनेअपनेलिएलिहाफ़बुने
ज़र्दशिरयानकोधुएँसेभरा
फेफड़ोंपरसियाहराखमली
नागा-साकीमेंफूलकाश्तकिए
नज़्मबेरूतमेंमुकम्मलकी
लोरकाकोकलाईपरबाँधा
हो-ची-मिन्हकोनियाममेंरखा
साढ़ेलेनिनबजेस्कूलगए
सुब्ह-ए-ईसाकोशाममेंरक्खा
अरमुग़ान-ए-हिजाज़मेंसोए
होलीवुडकीअज़ानपरजागे
डाइरीमेंसुधारथालिखा
दर्दकोफ़लसफ़ेकीलोरीदी
ज़ख़्मपरशाइ'रीकाफाहारक्खा
तनमशीनोंकीथापपरथिरके
दिलकिताबोंकीतालपरनाचा
हमनेफ़िरऔनकाक़सीदालिखा
हमनेकूफ़ेमेंमरसिएबेचे
हमनेबोसोंकाकारोबारकिया
हमनेआँखोंकेआइनेबेचे
ज़िंदगीकीलगननहींहमको
ज़िंदगीकीहमेंथकनभीनहीं
हमकिहीरोनहींविलेनभीनहीं
  - Jawayd Anwar
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