nigal ga.e sab ki sab samundar zameen bachi ab kahii nahin hai | निगल गए सब की सब समुंदर ज़मीं बची अब कहीं नहीं है

  - Javed Akhtar
निगलगएसबकीसबसमुंदरज़मींबचीअबकहींनहींहै
बचातेहमअपनीजानजिसमेंवोकश्तीभीअबकहींनहींहै
बहुतदिनोंबा'दपाईफ़ुर्सततोमैंनेख़ुदकोपलटकेदेखा
मगरमैंपहचानताथाजिसकोवोआदमीअबकहींनहींहै
गुज़रगयावक़्तदिलपेलिखकरजानेकैसीअजीबबातें
वरक़पलटताहूँमैंजोदिलकेतोसादगीअबकहींनहींहै
वोआगबरसीहैदोपहरमेंकिसारेमंज़रझुलसगएहैं
यहाँसवेरेजोताज़गीथीवोताज़गीअबकहींनहींहै
तुमअपनेक़स्बोंमेंजाकेदेखोवहाँभीअबशहरहीबसेहैं
किढूँढतेहोजोज़िंदगीतुमवोज़िंदगीअबकहींनहींहै
  - Javed Akhtar
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