kis li.e kijeye bazm-aaraai | किस लिए कीजे बज़्म-आराई

  - Javed Akhtar
किसलिएकीजेबज़्म-आराई
पुर-सुकूँहोगईहैतन्हाई
फिरख़मोशीनेसाज़छेड़ाहै
फिरख़यालातनेलीअँगड़ाई
यूँँसुकूँ-आश्नाहुएलम्हे
बूँदमेंजैसेआएगहराई
इकसेइकवाक़िआ'हुआलेकिन
गईतेरेग़मकीयकताई
कोईशिकवाग़मकोईयाद
बैठेबैठेबसआँखभरआई
ढलकीशानोंसेहरयक़ींकीक़बा
ज़िंदगीलेरहीहैअँगड़ाई
  - Javed Akhtar
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