kabhi kabhi main ye sochta hooñ ki mujh ko teri talash kyun hai | कभी कभी मैं ये सोचता हूँ कि मुझ को तेरी तलाश क्यूँँ है

  - Javed Akhtar
कभीकभीमैंयेसोचताहूँकिमुझकोतेरीतलाशक्यूँँहै
किजबहैंसारेहीतारटूटेतोसाज़मेंइर्तिआशक्यूँँहै
कोईअगरपूछतायेहमसेबतातेहमगरतोक्याबताते
भलाहोसबकाकियेपूछाकिदिलपेऐसीख़राशक्यूँँहै
उठाकेहाथोंसेतुमनेछोड़ाचलोदानिस्तातुमनेतोड़ा
अबउल्टाहमसेतोयेपूछोकिशीशायेपाशपाशक्यूँँहै
अजबदो-राहेपेज़िंदगीहैकभीहवसदिलकोखींचतीहै
कभीयेशर्मिंदगीहैदिलमेंकिइतनीफ़िक्र-ए-मआ'शक्यूँँहै
फ़िक्रकोईजुस्तुजूहैख़्वाबकोईआरज़ूहै
येशख़्सतोकबकामरचुकाहैतोबे-कफ़नफिरयेलाशक्यूँँहै
  - Javed Akhtar
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