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Jaun Elia
shab jo ham se hua muaaf karo
shab jo ham se hua muaaf karo | शब जो हम से हुआ मुआ'फ़ करो
- Jaun Elia
शब
जो
हम
से
हुआ
मुआ'फ़
करो
नहीं
पी
थी
बहक
गए
होंगे
- Jaun Elia
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कुछ
इशारा
जो
किया
हम
ने
मुलाक़ात
के
वक़्त
टाल
कर
कहने
लगे
दिन
है
अभी
रात
के
वक़्त
Insha Allah Khan
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शिकस्ता
दिल
शब-ए-ग़म
दर्द
रुसवाई
अरे
इतना
तो
चलता
है
मुहब्बत
में
Sapna Moolchandani
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अभी
हमको
मुनासिब
आप
होते
से
नहीं
लगते
ब–चश्म–ए–तर
मुख़ातिब
हैं
प
रोते
से
नहीं
लगते
वही
दर्या
बहुत
गहरा
वही
तैराक
हम
अच्छे
हुआ
है
दफ़्न
मोती
अब
कि
गोते
से
नहीं
लगते
ये
आई
रात
आँखों
को
चलो
खूँ–खूँ
किया
जाए
बदन
ये
सो
भी
जाए
आँख
सोते
से
नहीं
लगते
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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बदन
लिए
तलाशता
फिरू
हूँ
रात
दिन
उसे
सुना
है
जान
भी
मेरी
कहीं
इसी
शहर
में
है
Bhaskar Shukla
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बिगड़
गई
थी
जो
दुनिया
सॅंवार
दी
हमने
चढ़ा
के
सर
पे
मुहब्बत
उतार
दी
हमने
अँधेरी
रात
किसी
बे-वफ़ा
की
यादों
में
बहुत
तवील
थी
लेकिन
गुज़ार
दी
हमने
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Hameed Sarwar Bahraichi
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जब
तुझे
याद
कर
लिया
सुब्ह
महक
महक
उठी
जब
तेरा
ग़म
जगा
लिया
रात
मचल
मचल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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रात
भर
उन
का
तसव्वुर
दिल
को
तड़पाता
रहा
एक
नक़्शा
सामने
आता
रहा
जाता
रहा
Akhtar Shirani
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नींद
भी
जागती
रही
पूरे
हुए
न
ख़्वाब
भी
सुब्ह
हुई
ज़मीन
पर
रात
ढली
मज़ार
में
Adil Mansuri
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फिर
से
मिलने
आ
गईं
तन्हाइयाँ
क्यूँँ
नहीं
खुलते
हैं
दफ़्तर
रात
में
Vikram Sharma
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वो
आफ़ताब
लाने
का
देकर
हमें
फ़रेब
हम
सेे
हमारी
रात
के
जुगनू
भी
ले
गया
Rajesh Reddy
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गाहे
गाहे
बस
अब
यही
हो
क्या
तुम
से
मिल
कर
बहुत
ख़ुशी
हो
क्या
मिल
रही
हो
बड़े
तपाक
के
साथ
मुझ
को
यकसर
भुला
चुकी
हो
क्या
याद
हैं
अब
भी
अपने
ख़्वाब
तुम्हें
मुझ
से
मिल
कर
उदास
भी
हो
क्या
बस
मुझे
यूँँही
इक
ख़याल
आया
सोचती
हो
तो
सोचती
हो
क्या
अब
मिरी
कोई
ज़िंदगी
ही
नहीं
अब
भी
तुम
मेरी
ज़िंदगी
हो
क्या
क्या
कहा
इश्क़
जावेदानी
है!
आख़िरी
बार
मिल
रही
हो
क्या
हाँ
फ़ज़ा
याँ
की
सोई
सोई
सी
है
तो
बहुत
तेज़
रौशनी
हो
क्या
मेरे
सब
तंज़
बे-असर
ही
रहे
तुम
बहुत
दूर
जा
चुकी
हो
क्या
दिल
में
अब
सोज़-ए-इंतिज़ार
नहीं
शम-ए-उम्मीद
बुझ
गई
हो
क्या
इस
समुंदर
पे
तिश्ना-काम
हूँ
मैं
बान
तुम
अब
भी
बह
रही
हो
क्या
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Jaun Elia
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ये
बहुत
ग़म
की
बात
हो
शायद
अब
तो
ग़म
भी
गँवा
चुका
हूँ
मैं
Jaun Elia
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सारी
दुनिया
के
ग़म
हमारे
हैं
और
सितम
ये
कि
हम
तुम्हारे
हैं
Jaun Elia
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बहुत
नज़दीक
आती
जा
रही
हो
बिछड़ने
का
इरादा
कर
लिया
क्या
Jaun Elia
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इक
महक
सिम्त
ए
दिल
से
आई
थी
मैं
ये
समझा
तेरी
सवारी
है
Jaun Elia
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