ईज़ा-दहीकीदादजोपातारहाहूँमैं
हरनाज़-आफ़रींकोसतातारहाहूँमैं
ऐख़ुश-ख़िरामपाँवकेछालेतोगिनज़रा
तुझकोकहाँकहाँनफिरातारहाहूँमैं
इकहुस्न-ए-बे-मिसालकीतमसीलकेलिए
परछाइयोंपेरंगगिरातारहाहूँमैं
क्यामिलगयाज़मीर-ए-हुनरबेचकरमुझे
इतनाकिसिर्फ़कामचलातारहाहूँमैं
रूहोंकेपर्दा-पोशगुनाहोंसेबे-ख़बर
जिस्मोंकीनेकियाँहीगिनातारहाहूँमैं
तुझकोख़बरनहींकितिराकर्बदेखकर
अक्सरतिरामज़ाक़उड़ातारहाहूँमैं
शायदमुझेकिसीसेमोहब्बतनहींहुई
लेकिनयक़ीनसबकोदिलातारहाहूँमैं
इकसत्रभीकभीनलिखीमैंनेतेरेनाम
पागलतुझीकोयादभीआतारहाहूँमैं
जिसदिनसेए'तिमादमेंआयातिराशबाब
उसदिनसेतुझपेज़ुल्महीढातारहाहूँमैं
अपनामिसालियामुझेअबतकनमिलसका
ज़र्रोंकोआफ़्ताबबनातारहाहूँमैं
बेदारकरकेतेरेबदनकीख़ुद-आगही
तेरेबदनकीउम्रघटातारहाहूँमैं
कलदोपहरअजीबसीइकबे-दिलीरही
बसतीलियाँजलाकेबुझातारहाहूँमैं