तेग़-बाज़ीकाशौक़अपनीजगह
आपतोक़त्ल-ए-आमकररहेहैं
दाद-ओ-तहसीनकायेशोरहैक्यूँँ
हमतोख़ुदसेकलामकररहेहैं
हमहैंमसरूफ़-ए-इंतिज़ाममगर
जानेक्याइंतिज़ामकररहेहैं
हैवोबेचारगीकाहालकिहम
हरकिसीकोसलामकररहेहैं
एकक़त्तालाचाहिएहमको
हमयेएलान-ए-आमकररहेहैं
हमतोआएथेअर्ज़-ए-मतलबको
औरवोएहतिरामकररहेहैं
नउठेआहकाधुआँभीकिवो
कू-ए-दिलमेंख़िरामकररहेहैं
उसकेहोंटोंपेरखकेहोंटअपने
बातहीहमतमामकररहेहैं
हमअजबहैंकिउसकेकूचेमें
बे-सबबधूम-धामकररहेहैं