ek hi muzda subh laati hai | एक ही मुज़्दा सुब्ह लाती है

  - Jaun Elia
एकहीमुज़्दासुब्हलातीहै
धूपआँगनमेंफैलजातीहै
रंग-ए-मौसमहैऔरबाद-ए-सबा
शहरकूचोंमेंख़ाकउड़ातीहै
फ़र्शपरकाग़ज़उड़तेफिरतेहैं
मेज़परगर्दजमतीजातीहै
सोचताहूँकिउसकीयादआख़िर
अबकिसेरातभरजगातीहै
मैंभीइज़्न-ए-नवा-गरीचाहूँ
बे-दिलीभीतोलबहिलातीहै
सोगएपेड़जागउठीख़ुश्बू
ज़िंदगीख़्वाबक्यूँँदिखातीहै
उससरापावफ़ाकीफ़ुर्क़तमें
ख़्वाहिश-ए-ग़ैरक्यूँँसतातीहै
आपअपनेसेहम-सुख़नरहना
हम-नशींसाँसफूलजातीहै
क्यासितमहैकिअबतिरीसूरत
ग़ौरकरनेपेयादआतीहै
कौनइसघरकीदेख-भालकरे
रोज़इकचीज़टूटजातीहै
  - Jaun Elia
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