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Jauhar Rahmani
daa
daa | दादी अम्माँ जल्दी आओ
- Jauhar Rahmani
दादी
अम्माँ
जल्दी
आओ
आ
कर
एक
कहानी
सुनाओ
आओ
बैठो
पास
हमारे
शाही
शालू
पप्पी
दुलारे
इक
बच्चा
था
नेक
और
अच्छा
दिल
का
साफ़
ज़बाँ
का
सच्चा
माँ
से
अपनी
कर
के
मिन्नत
सफ़र
की
माँगी
उस
ने
इजाज़त
माँ
ने
रक़म
सदरी
में
सी
कर
कर
दिया
रुख़्सत
आँसू
पी
कर
चलते
चलते
की
ये
नसीहत
चाहे
जितनी
आए
मुसीबत
झूट
कभी
लब
पर
मत
आए
चाहे
जान
भले
ही
जाए
चला
सफ़र
पर
जब
वो
बच्चा
मन
का
साफ़
ज़बाँ
का
सच्चा
रस्ते
में
कुछ
डाकू
आए
ज़ुल्म-ओ-सितम
हर
इक
पर
ढाए
आख़िर
में
बच्चे
से
पूछा
पास
तिरे
जो
कुछ
हो
बतला
बच्चे
ने
कुछ
ख़ौफ़
न
खाया
जो
कुछ
सच
था
उन
को
बताया
चीर
के
सदरी
रक़म
दिखा
दी
माँ
की
नसीहत
उन
को
बता
दी
बच्चे
की
जो
देखी
सदाक़त
पाई
उस
डाकू
ने
नसीहत
तौबा
बुरे
कामों
से
कर
ली
और
ईमान
से
झोली
भर
ली
शैख़
अबदुल-क़ादिर
जीलानी
दुनिया
उन्हें
इस
नाम
से
जानी
- Jauhar Rahmani
'हर्ष'
वस्ल
में
जितनी
मर्ज़ी
शे'र
कह
लो
तुम
हिज्र
के
बिना
इन
में
जान
आ
नहीं
सकती
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Harsh saxena
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इतनी
मिलती
है
मिरी
ग़ज़लों
से
सूरत
तेरी
लोग
तुझ
को
मिरा
महबूब
समझते
होंगे
Bashir Badr
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तुम्हें
हुस्न
पर
दस्तरस
है
मोहब्बत
वोहब्बत
बड़ा
जानते
हो
तो
फिर
ये
बताओ
कि
तुम
उस
की
आँखों
के
बारे
में
क्या
जानते
हो
ये
जुग़राफ़िया
फ़ल्सफ़ा
साईकॉलोजी
साइंस
रियाज़ी
वग़ैरा
ये
सब
जानना
भी
अहम
है
मगर
उस
के
घर
का
पता
जानते
हो
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Tehzeeb Hafi
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ये
नहीं
है
कि
वो
एहसान
बहुत
करता
है
अपने
एहसान
का
एलान
बहुत
करता
है
आप
इस
बात
को
सच
ही
न
समझ
लीजिएगा
वो
मेरी
जान
मेरी
जान
बहुत
करता
है
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Jawwad Sheikh
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बस
यूँँ
ही
मेरा
गाल
रखने
दे
मेरी
जान
आज
गाल
पर
अपने
Jaun Elia
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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गर
उदासी,
चिड़चिड़ापन,
जान
देना
प्यार
है
माफ़
करना,
काम
मुझको
और
भी
हैं
दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
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अपने
होटों
की
ये
तहरीर
रखो
अपने
पास
हम
वो
'आशिक़
हैं
जो
आँखों
को
पढ़ा
करते
हैं
Meem Alif Shaz
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जब
तलक
अनजान
थे
मेहफ़ूज़
थे
जान
लेना
जानलेवा
हो
गया
Vishal Bagh
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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