mast hawa jab saawan ki angadaai le kar aati hai | मस्त हवा जब सावन की अंगड़ाई ले कर आती है

  - Jauhar Nizami
मस्तहवाजबसावनकीअंगड़ाईलेकरआतीहै
औरफ़लकपरकालीकालीबदलीजबछाजातीहै
छम-छमछम-छमनन्हीबूँदेंइठलाकरजबआतीहैं
प्रेमकीहल्कीतानोंमेंरावीकीलहरेंगातीहैं
भीगेभीगेसावनमेंजबकोयलकूकसुनातीहै
पायलकीझंकारोंकीजबधीमीआहटआतीहै
उसवक़्तकिनारेरावीकेइकदिलकशमंज़रहोताहै
पिछलेपहरजबधीमीधीमीठंडीहवाएँआतीहैं
गाँवकीसुंदरआँखोंवालीपानीभरनेजातीहैं
प्रेमकेमंदिरमेंगंगा-जलकोईचढ़ानेजातीहै
देवीकेचरनोंमेंकोईमीठेबोलसुनातीहै
रावीकीलहरोंमेंछुपकरमुरलीकोईबजाताहै
जंगलकीख़ामोशफ़ज़ामेंअमृत-रसबरसाताहै
उसवक़्तकिनारेरावीकेइकदिलकशमंज़रहोताहै
सब्ज़ाफूलपतावरग़ुंचेऔरनग़्मेंसोजातेहैं
धरतीपरआकाशसेजबमा'सूमफ़रिश्तेआतेहैं
शामहुईमंदिरमेंदेखोघंटेलोगबजातेहैं
रातहुईबैलोंकोलेकरहरवाहेअबजातेहैं
हल्कीहल्कीबूंदोंमेंजबदुनियासावनगातीहै
हरी-भरीशाख़ोंमेंछुपकरकोयलकूकसुनातीहै
कुछदिनकेबिछड़ेहुएसाथीहँसकेगलेजबमिलतेहैं
चाँदनीरातोंमेंग़ुंचेजबचटकचटककरखिलतेहैं
उसवक़्तकिनारेरावीकेइकदिलकशमंज़रहोताहै
  - Jauhar Nizami
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