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Javed Aslam
jazbaat-o-khayaalaat-o-manaazir pe na rukna
jazbaat-o-khayaalaat-o-manaazir pe na rukna | जज़्बात-ओ-ख़यालात-ओ-मनाज़िर पे न रुकना
- Javed Aslam
जज़्बात-ओ-ख़यालात-ओ-मनाज़िर
पे
न
रुकना
झोंके
हैं
हवाओं
के
ये
चलते
ही
रहेंगे
हिजरत
के
भी
दरवाज़े
खुले
रखना
है
दिल
में
दुनिया
है
यहाँ
लोग
निकलते
ही
रहेंगे
- Javed Aslam
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इस
से
पहले
कि
ज़मीं-ज़ाद
शरारत
कर
जाएँ
हम
सितारों
ने
ये
सोचा
है
कि
हिजरत
कर
जाएँ
दौलत-ए-ख़्वाब
हमारे
जो
किसी
काम
न
आई
अब
किसी
को
नहीं
मिलने
की
वसिय्यत
कर
जाएँ
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Idris Babar
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कभी
न
लौट
के
आया
वो
शख़्स,
कहता
था
ज़रा
सा
हिज्र
है
बस
सरसरी
बिछड़ना
है
Subhan Asad
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ख़्वाबों
को
आँखों
से
मिन्हा
करती
है
नींद
हमेशा
मुझ
सेे
धोखा
करती
है
उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वग़ैरा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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तुम
अपने
बारे
में
कुछ
देर
सोचना
छोड़ो
तो
मैं
बताऊँ
कि
तुम
किस
क़दर
अकेले
हो
Waseem Barelvi
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इक
तेरा
हिज्र
दाइमी
है
मुझे
वर्ना
हर
चीज़
आरज़ी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
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काट
पाऊँगा
मैं
कैसे
ज़िंदगी
तेरे
बग़ैर
तीन
दिन
का
हिज्र
मुझ
को
लग
रहा
है
तीन
साल
Afzal Ali Afzal
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उसकी
टीस
नहीं
जाती
है
सारी
उम्र
पहला
धोखा
पहला
धोखा
होता
है
Shariq Kaifi
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मैं
तेरे
बाद
कोई
तेरे
जैसा
ढूँढता
हूँ
जो
बे-वफ़ाई
करे
और
बे-वफ़ा
न
लगे
Abbas Tabish
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सर
झुकाओगे
तो
पत्थर
देवता
हो
जाएगा
इतना
मत
चाहो
उसे
वो
बे-वफ़ा
हो
जाएगा
Bashir Badr
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एक
अकेले
की
ख़ातिर
जब
दो
कप
कॉफी
में
चीनी
आज
मिलाते
हैं
तो
रो
देते
हैं
हम
Atul K Rai
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ये
दुनिया
से
कब
कोई
क्या
ले
गया
अमल
ख़ुद
का,
सब
की
दु'आ
ले
गया
हुआ
ख़ुश
बहुत
पा
के
साहिल
मगर
जवानी
को
तूफ़ां
उड़ा
ले
गया
दबे
पाँव
आया
फ़रिश्ता
यहाँ
क़फ़स
से
परिन्दा
छुड़ा
ले
गया
जो
बैठा
हूँ
तन्हाई
के
साथ
मैं
न
जाने
मुझे
दिल
कुजा
ले
गया
हुनर
उस
का
ये
भी
कोई
कम
न
था
कि
ज़ख़्मों
को
अपने
छिपा
ले
गया
था
वीरां
मेरा
दिल
उसे
क्या
पता
ख़ज़ाना
समझ
कर
चुरा
ले
गया
बिखर
के
पड़ा
था
तू
'असलम'
यहाँ
जिसे
जो
मिला
वो
उठा
ले
गया
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Javed Aslam
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फ़ज़ाओं
में
मोहब्बत
मुस्तरद
है
ये
कैसे
लोग
हैं
कैसा
बलद
है
Javed Aslam
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क़त्ल
कर
तो
दिया
इक
नज़र
से
मगर
फिर
न
जाने
वो
क़ातिल
कहाँ
रह
गया
Javed Aslam
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ज़िन्दगी
से
बड़ी
अता
ही
नहीं
शुक्र
कैसे
करूँँ
पता
ही
नहीं
Javed Aslam
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अजब
है
इम्तिहान-ए-ज़िंदगी
'असलम'
जहाँ
में
इसी
पर्चे
में
हल
भी
है
इसी
में
मसअला
है
Javed Aslam
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