yaad hai us ne mujh se kaha tha | याद है उस ने मुझ से कहा था

  - Janan Malik
यादहैउसनेमुझसेकहाथा
जानाँ
बैठो
आजबड़ेदिनबा'दआईहो
शायदतुमतोइनगलियोंकोइनरस्तोंकोदरवाज़ोंको
इकमुद्दतसेभूलचुकीहो
रिश्तोंकेदरवाज़ोंसेदरवाज़ेमिलतेहैं
औरदीवारेंदीवारोंसे
आँखोंसेओझलहोनेसे
रिश्तेकमनहींपड़जाते
उसनेकहाफिर
बैठोजानाँचायपियोगी
आजतुम्हेंमैंअपनेहाथकीचायलाकरदेताहूँ
पीकरमुझेबतानातुम
कैसीहैये
जानतीहोनामुझे
भुलक्कड़साहूँमैं
चीज़ेंअक्सररखकरकहींपेभी
खोजाताहूँ
सोचोंमेंगुमहोजाताहूँ
यादनहींरहताहैअक्सर
चीनीडालीहैयाफीकी
लेकिनछोड़ोमेरीगुमशुदगीकीबातें
चायपीकरबतलानातुम
इसमेंमीठाकमयाज़ियादा
याफीकीहै
मीठाडालनाभूलगयाहूँ
याफिर
उसकेचेहरेपरआई
उसएकतमन्नाकीवोरंगत
शादाबीमैंदेखरहीथी
उसकीआँखेंमेरेलबोंसे
दाद-तलबथीं
उसकीआँखेंढूँडरहीथींजानेक्या
मेरीआँखोंमें
उसनेकहाफिर
जानाँ
चायमीठीहुईतोतुमजैसीहै
फीकीहुईतोमुझजैसी
हँसतेहँसतेचायकाफिरसिपलियामैंने
उसकाध्यानबटाकर
फिरबातोंबातोंमेंमैंने
उसकाकपभीपीडाला
उसचेहरेकीशादाबी
केमुरझानेसेपहलेपहले
उसइकफूलकेकुम्हलानेसेपहलेपहले
चाहतकेमौसमकीसरहद
मीठेफीके
दोलफ़्ज़ोंकीदूरीपरहै
  - Janan Malik
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Kashmir Shayari

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