fikr-e-ranj-o-alam aur main | फ़िक्र-ए-रंज-ओ-अलम और मैं

  - Jaleel Arshad Khan Rashid
फ़िक्र-ए-रंज-ओ-अलमऔरमैं
हमराहीइकग़मऔरमैं
तेरीबातेंकरतेहैं
रातदवातक़लमऔरमैं
तुझकोढूँडतेरहतेहैं
मेरीचश्म-ए-नमऔरमैं
पासहैमेरेइंटरनेट
हाथमेंजाम-ए-जमऔरमैं
एकतोतेरीकज-ख़ु्ल्क़ी
फिरदुनियाकेसितमऔरमैं
कबतकसाथजलें'राशिद'
हिज्रकेयेमौसमऔरमैं
  - Jaleel Arshad Khan Rashid
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