कुछऔरमिरेदर्दकेशो'लोंकोहवादो
बे-नूरहुएदाग़अँधेराहैज़ियादो
पीछेग़म-ओ-अंदोहकेफ़िरऔनकालश्कर
आगेअलम-ओ-यासकादरियाहैअसादो
मैंदश्त-ए-ग़म-ए-इश्क़मेंहँसताहुआआऊँ
रस्तेसेग़म-ए-दहरकीदीवारहटादो
मैंऔरसुलगताहुआसहरा-ए-तजस्सुस
भटकाहुआराहीहूँकोईराहदिखादो
क्यूँँमेरीशिकस्तोंकोसहारानहींमिलता
इंसानहूँमुहताजख़ुदाकाहूँख़ुदादो
इसशहरमेंजीनेकीहैअबएकहीसूरत
एहसासकेमंसूरकोसूलीपेचढ़ादो
इसदौरकासुक़रातहूँसचबोलरहाहूँ
क्यादेरहैक्यूँँचुपहोमुझेज़हरपिलादो