arz jo kuchh meri zabaani hai | अर्ज़ जो कुछ मेरी ज़बानी है

  - Jalal Kakvi
अर्ज़जोकुछमेरीज़बानीहै
आप-बीतीनहींकहानीहै
जिसनेमुँहमदरसेकादेखलिया
ज़िंदगीमेंवोआँ-जहानीहै
राहमकतबकीभूलनेकेलिए
ख़ाकइकइकगलीकीछानीहै
पढ़नेलिखनेमेंजीनहींलगता
मारखानेकीयेनिशानीहै
ख़ाकपढ़िएजोहोग़िज़ाऐसी
भातकंकरहैदालपानीहै
जौर-ए-उस्तादहैमहर-ए-पिदर
किसक़यामतकीयेगिरानीहै
हरजुमागुड-फ्राइडेहैमिरा
रातभीउसकीक्यासुहानीहै
पारहूँइम्तिहाँकेदरियासे
नावकाग़ज़कीयूँँचलानीहै
फिरभलाहमकहाँकहाँमस्जिद
येनमाज़अपनीइम्तिहानीहै
येग़ज़लख़ूबहै'जलाल'मियाँ
क्यासलासतहैक्यारवानीहै
लखनवीयेजलालगरचेनहीं
काकवीयेजलाल-ए-सानीहै
  - Jalal Kakvi
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