jaah-o-hashmat nahin jalaal nahin | जाह-ओ-हशमत नहीं जलाल नहीं

  - Jahangeer Khan Jauhar
जाह-ओ-हशमतनहींजलालनहीं
फिरभीछेड़ेकोईमजालनहीं
इज़्ज़त-ए-नफ़्ससबकोप्यारीहै
फ़र्दयाक़ौमकासवालनहीं
हाँवोबेहदहसींसहीलेकिन
बज़्म-ए-आलममेंबे-मिसालनहीं
कैसेशिकवेगिलेकिमुद्दतसे
हिज्रहीहिज्रहैविसालनहीं
मेरीहस्तीवजूदरखतीहै
मैंकिसीज़ेहनकाख़यालनहीं
अपनेमाज़ीपेसिर्फ़नाज़करे
इतनागुज़राहुआभीहालनहीं
अपनेफ़नकेदिखाइए'जौहर'
शे'रकहनाकोईकमालनहीं
  - Jahangeer Khan Jauhar
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