jeene men thii na naza' ke ranj o mehn men thii | जीने में थी न नज़अ के रंज ओ मेहन में थी

  - Jagat Mohan Lal Ravan
जीनेमेंथीनज़अकेरंजमेहनमेंथी
आशिक़कीएकबातजोदीवाना-पनमेंथी
सादावरक़थाबाहमागुल-हा-ए-रंग-रंग
तफ़्सीरजानपाकबयाज़-ए-कफ़नमेंथी
बढ़ताथाऔरज़ौक़-ए-तलबबेकसीकेसाथ
कुछदिलकशीअजीबनवाह-ए-वतनमेंथी
बीमारजबहैंकरतेहैंफ़रियादचारा-गर
क्यादास्तान-ए-दर्दसुकूत-ए-महनमेंथी
कहताथाचश्म-ए-शौक़सेवोआफ़्ताब-ए-हुस्न
हल्कीसीइकशुआथीजोअंजुमनमेंथी
कुछइज़्तिराब-ए-इश्क़काआलमपूछिए
बिजलीतड़परहीथीकिजानइसबदनमेंथी
किससेकहूँकिथीवहीगुल-हा-ए-रंग-रंग
बिखरीहुईजोख़ाकसवाद-ए-चमनमेंथी
  - Jagat Mohan Lal Ravan
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy