hujoom-e-yaas men bhi aas jaavedaan thehri | हुजूम-ए-यास में भी आस जावेदाँ ठहरी

  - Jafar Raza
हुजूम-ए-यासमेंभीआसजावेदाँठहरी
येअपनीधरतीकीबू-बास-ए-बे-कराँठहरी
वोरोकतेरहेमुल्कोंकीसरहदोंकेपरे
कशिशदिलोंकीतोपुर्वाईथीकहाँठहरी
उम्मीद-ओ-बीममेंकितनेकँवलहुएरौशन
तुम्हारीचश्म-ए-तग़ाफ़ुलजहाँजहाँठहरी
नुमूद-ए-फ़िक्रनेकितनेबनाएरेतपेनक़्श
मैंक्याकरूँँकियेतस्वीरबे-ज़बाँठहरी
हरएककासा-ए-सरहैफ़क़ीरकापियाला
ज़बाँसवाली-ए-बेकसतोबे-ज़बाँठहरी
वहीहयातजोसबकेलिएथीराहत-ए-जाँ
वहीमिरेलिएइकमर्ग-ए-बे-अमाँठहरी
कहींइफ़ादाकहींमोल-तोलकीबातें
येफ़िक्र-ए-नौतोकिसीबनिएकीदुकाँठहरी
  - Jafar Raza
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