dasht men gulshan men har ja ki hai teri justuju | दश्त में गुलशन में हर जा की है तेरी जुस्तुजू

  - Jafar Abbas Safvi
दश्तमेंगुलशनमेंहरजाकीहैतेरीजुस्तुजू
अबकहाँलेजारहाहैफ़रेब-ए-रंग-ओ-बू
आपइतनातोबतादेंकबकरमहोगाहुज़ूर
कबमुरव्वतमेंबदलजाएगीयेनफ़रतकीख़ू
सादगी-ए-दिलपेअपनीरश्कआताहैमुझे
इकवफ़ाना-आश्नासेहैवफ़ाकीआरज़ू
इश्क़कीमंज़िलमेंलाखोंकारवाँगुमहोगए
रहरव-ए-राह-ए-मोहब्बतक्याकरेंगेजुस्तुजू
रहगएहैंअबतोलेदेकरदिल-ए-बर्बादमें
हसरत-ए-दीदारकाग़मऔरतेरीआरज़ू
देरहीहैअपनेदामनकीहवाबाद-ए-सहर
तेरीज़ुल्फ़-ए-अम्बरींहैइकजहान-ए-रंग-ओ-बू
जबकभीसाक़ीने'जाफ़र'अपनीनज़रेंफेरलीं
मय-कदेमेंपीलियाहैमैंनेअरमाँकालहू
  - Jafar Abbas Safvi
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