sadaa ae aah o fugan jab bhi rang laati hai | सदा ए आह ओ फ़ुग़ाँ जब भी रंग लाती है

  - Jaani Lakhnavi
सदाआहफ़ुग़ाँजबभीरंगलातीहै
खिज़ां-रसीदाज़मीनोंपेगुलखिलातीहै
गुलोंकेजिस्मपेचेहराहवाबनातीहै
फिरउसकेबादमुझेरौशनीसतातीहै
उठाकेलातेहैंसहरासेरोज़ख़ुदकोहम
बड़ेसलीकेसेइकयादछोड़आतीहै
सवालगर्दिशदौरांकीमुंतशिरमिट्टी
खिलौनेवक़्तकेकैसेबनायेजातीहै
बनाकेबैठाहूँमिट्टीकेढेरपेक्याकुछ
यहदेखनाहैकेअबक्याहवाबनातीहै
किसीकेजिस्मकोमंज़रबनानेलगताहूँ
सुकूतेशाममुझेदास्ताँसुनातीहै
गुरेज़पाहुईजातीहैआबरूमुझसेे
हयालिबासमेंपैबन्दटाँकजातीहै
क़ज़ानेछेड़दियासाज़-ए-आखरी'जानी'
लोदरमियान-ए-क़फ़सअबबहारआतीहै
  - Jaani Lakhnavi
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